2026 में भारत-PAK के बीच होगी जंग, अमेरिकी थिंक टैंक का दावा: दोनों देशों ने हथियारों की खरीद बढ़ाई
अमेरिका के प्रमुख थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने अपनी रिपोर्ट ‘Conflicts to Watch in 2026’ में चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव की संभावना बनी रह सकती है।
अमेरिका के प्रमुख थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने अपनी रिपोर्ट ‘Conflicts to Watch in 2026’ में चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव की संभावना बनी रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियां और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं।
कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में अभी कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है, लेकिन खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि इस सर्दी में जम्मू क्षेत्र में 30 से अधिक पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं। CFR ने चेतावनी दी है कि ये गतिविधियां भारत-पाकिस्तान संबंधों में टकराव का कारण बन सकती हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव
CFR ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संभावित संघर्ष की भी बात की है। अक्टूबर 2025 में सीमा विवाद के दौरान पाकिस्तान ने TTP के नेता नूर वली महसूद को मारने के लिए काबुल पर एयरस्ट्राइक की थी। अफगानिस्तान ने इसका कड़ा जवाब दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया। रिपोर्ट के अनुसार 2026 में दोनों देशों के बीच सीमित सैन्य झड़पें हो सकती हैं।
भारत-पाकिस्तान की सैन्य तैयारियां
10 मई 2025 को हुए संघर्षविराम के बाद दोनों देशों ने हथियारों और रक्षा खरीद को तेज कर दिया है। भारत में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग 79 हजार करोड़ रुपये के सौदे मंजूर किए, जिनमें ड्रोन, एयर-टू-एयर मिसाइल और गाइडेड बम शामिल हैं। पाकिस्तान ने तुर्की और चीन से नए ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए बातचीत शुरू की है।
ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव
रिपोर्ट में बताया गया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए और 9 आतंकी कैंप नष्ट किए गए। 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने सभी प्रयासों को सफलतापूर्वक नाकाम किया। 10 मई को दोनों देशों के DGMO ने संपर्क कर LoC पर गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने का समझौता किया।
रिपोर्ट का निष्कर्ष
CFR का कहना है कि दक्षिण एशिया में शांति नाजुक बनी हुई है। कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव को देखते हुए 2026 में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
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