PM के साथ लोकसभा में अप्रत्याशित घटना घट सकती थी: स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया। 2024 के बाद पहली बार यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पास हुआ है। गुरुवार को लोकसभा शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की।
नई दिल्ली: लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इसी बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। ओम बिरला ने कहा कि, पीएम मोदी ने मेरी बात को माना इसके लिए उन्हें धन्यवाद। स्पीकर ने कहा, पीएम मोदी मेरी बात मानकर संसद नहीं आए, क्योंकि यहां पर अप्रत्याशित घटना घट सकती थी। साथ ही उन्होंने सभी सांसदों को मर्यादा में रहने की नसीहत भी दी।
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही ध्वनिमत से पारित कर दिया। 2024 के बाद पहली बार यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पास हुआ है। गुरुवार को लोकसभा शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की। बता दें कि पीएम मोदी को बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया, जिसके बाद पीएम का संबोधन टल गया।
लोकसभा से निलंबित सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, जब तक लोकसभा में राहुल गांधी को अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी जाती, तब तक विपक्ष पीएम नरेंद्र मोदी को सदन में बोलने नहीं देगा। गुरुवार को राज्यसभा में भी राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोकने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, राहुल को पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब पर नहीं बोलने दिया, मैं उस पर यहां बोलूंगा। इस पर उपसभापति ने उन्हें रोक दिया। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे से कहा, राहुल गांधी नियम नहीं मानते, आप उन्हें समझाते क्यों नहीं।
खड़गे के बयान पर जेपी नड्डा ने भी आपत्ति दर्ज कराई। नड्डा ने कहा, विपक्ष के नेता को यह जरूर पता होना चाहिए कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती। इसके बाद किरण रिजिजू ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संसद में नियमों और परंपराओं का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री अपना संबोधन देंगे और सभी सांसदों को उसे सुनना चाहिए। हो सकता है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री का संबोधन न सुनना चाहती हो, लेकिन अन्य सांसद जरूर सुनना चाहते हैं।
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