स्कूल में गरबा के बहाने नशे का प्रचार! मार्तंड क्र. 3 में लगीं गुटखा-पान मसाले के होर्डिंग्स

रीवा के मार्तंड स्कूल क्रमांक-3 में गरबा महोत्सव के दौरान खुलेआम गुटखा और पान मसाले के विज्ञापन लगाए गए हैं। स्कूल में परीक्षाएं चल रही हैं, और इस व्यावसायिक आयोजन में टिकट और फीस की वसूली भी हो रही है। सेवा पखवाड़े में नशामुक्ति अभियान के बीच यह आयोजन प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।

स्कूल में गरबा के बहाने नशे का प्रचार! मार्तंड क्र. 3 में लगीं गुटखा-पान मसाले के होर्डिंग्स

रीवा। एक ओर प्रशासन नवरात्रि के पावन अवसर पर ‘सेवा पखवाड़ा’ के तहत नशामुक्त समाज बनाने का अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर रीवा शहर के मध्य स्थित मार्तंड स्कूल क्रमांक-3 में आयोजित गरबा महोत्सव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

स्कूल के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में खुलेआम गुटखा और पान मसाले जैसे नशीले उत्पादों का प्रचार किया जा रहा है, जिससे अभिभावकों, छात्रों और जागरूक नागरिकों में गहरी नाराजगी है।

स्कूल में लगे नशीले उत्पादों के होर्डिंग्स

मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल ग्राउंड में गरबा आयोजन के लिए टेंट लगाए गए हैं, जहां कई कंपनियों के नशीले पान मसाले और गुटखा ब्रांड्स के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं। विशेष बात यह है कि इन दिनों स्कूल में परीक्षाएं भी चल रही हैं।

जब छात्र स्कूल पहुंचे और इन विज्ञापनों को देखा, तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए शिक्षकों से शिकायत की। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने पूरे मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।

प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी

इस गंभीर मुद्दे पर अब तक न तो शिक्षा विभाग और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। यह स्थिति प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सेवा पखवाड़ा अभियान की भावना पर भी कुठाराघात करती है।

सेवा पखवाड़े की भावना पर आघात

प्रशासन द्वारा नवरात्रि के दौरान शहर के विभिन्न स्कूलों में बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ऐसे समय में एक शैक्षणिक परिसर में नशीले उत्पादों का प्रचार प्रशासनिक मंशा और प्रयासों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

गरबा के नाम पर व्यावसायिक आयोजन, हो रही शुल्क वसूली

बताया जा रहा है कि यह आयोजन पूरी तरह से व्यावसायिक स्वरूप में किया जा रहा है। गरबा खेलने वाले प्रतिभागियों से प्रतिदिन ₹350 का शुल्क लिया जा रहा है, वहीं दर्शकों से भी ₹100 प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क वसूला जा रहा है।

एक शैक्षणिक और सार्वजनिक स्थान पर व्यावसायिक आयोजन करना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।

क्या कहते हैं नियम?

शैक्षणिक परिसरों में किसी भी प्रकार के तंबाकू या नशीले पदार्थों का प्रचार पूरी तरह से वर्जित है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA Act) के तहत भी इस प्रकार के प्रचार पर दंड का प्रावधान है।