भारत का पहला सेमी-ऑटोमेटेड विजिन्हम पोर्ट, 2030 तक नई समुद्री क्रांति की तैयारी; 9 महिलाओं का अहम रोल

अरब सागर की तेज हवाओं के साथ उठती लहरों के बीच, दक्षिणी केरल में खड़ा विजिन्हम पोर्ट भारत की नई समुद्री कहानी का शुरुआती पन्ना है।

भारत का पहला सेमी-ऑटोमेटेड विजिन्हम पोर्ट, 2030 तक नई समुद्री क्रांति की तैयारी; 9 महिलाओं का अहम रोल

 तिरुवनंतपुरम/विजिन्हम अरब सागर की तेज हवाओं के साथ उठती लहरों के बीच, दक्षिणी केरल में खड़ा विजिन्हम पोर्ट भारत की नई समुद्री कहानी का शुरुआती पन्ना है। जो देश को सीधे वैश्विक व्यापार के केंद्र से जोड़ रहा है। यह बंदरगाह सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो भारत को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क में एक निर्णायक आवाज दे रही है।

केरल सरकार और अदाणी समूह की साझेदारी में विकसित यह डीपवॉटर पोर्ट देश को वह रणनीतिक क्षमता दे रहा है। जिसकी कमी भारत लंबे समय से महसूस करता आया है। ये एक ऐसा ट्रांसशिपमेंट हब है। जहां दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज सीधे भारतीय तट पर आ सकेंगे।

विजिन्हम पोर्ट आखिर इतना खास क्यों है?

भारत के ज्यादातर पोर्ट जहाज 14–16 मीटर की गहराई तक ही संभाल पाते थे। अब दुनिया बदल चुकी है।आज के कंटेनर शिप छोटे–मोटे जहाज नहीं होते। इन्हें 18–20 मीटर गहराई चाहिए होती है।  यही वजह थी कि दुनिया के बड़े जहाज श्रीलंका के कोलंबो या फिर सिंगापुर में जाते थे  और भारत को भारी पैसे देकर कंटेनर ट्रांसशिपमेंट कराना पड़ता था।

आखिरकार अदाणी समूह के पोर्ट विजिन्हम ने यह कमी एक ही झटके में पूरी कर दी है। इसकी पहली खासियत है प्राकृतिक Deep-Water Port यहां समुद्र खुद ही इतना गहरा है कि 20 मीटर तक गहराई मिल जाती है। मतलब? बड़े, भारी-भरकम जहाज सीधे पोर्ट में लग सकते हैं कोई ड्रेजिंग, कोई खास जोड़-तोड़ नहीं करना पड़ता। 

दूसरी खासियत है इंटरनेशनल शिपिंग रूट के बिल्कुल पास दुनिया के बड़े जहाजों का जो इंटरनेशनल रूट है, वो विझिंजम से सिर्फ 10 नॉटिकल माइल दूर है। (10 नॉटिकल माइल का मतलब 18.52 किमी)  मतलब जहाज को रास्ता बदलने में न समय लगता है, न पैसा।

अब बात करते हैं जहाज MSC PALOMA PANAMA की

ये कोई मामूली जहाज नहीं है। इसकी क्षमता है 24,000 TEUs तक। मतलब इतना बड़ा जहाज दुनिया के गिने–चुने पोर्ट ही संभाल सकते हैं। और जब ऐसा जहाज विजिन्हम पोर्ट पहुंचता है और 10,576 TEUs का रिकॉर्ड एक्सचेंज करता है। तो इसका मतलब एकदम साफ है भारत अब दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को प्रोफेशनल तरीके से संभाल सकता है। ये सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं था। ये प्रधानमंत्री मोदी और अदाणी ग्रुप का संदेश था कि भारत अब समुद्री व्यापार में भारत बड़ा खिलाड़ी है।

कितना शक्तिशाली है विजिन्हम, 6 पॉइंट में जानिए

  • यह पोर्ट सिर्फ बड़ा नहीं, भारत का फ्यूचर है। सबसे पहले तो यह भारत का पहला सेमी-ऑटोमेटेड पोर्ट है।
  • यहां ज्यादातर काम मशीनें, सेंसर, कैमरे और सॉफ्टवेयर करते हैं। जिससे काम फास्ट होता है, सेफ होता है और गलती की गुंजाइश लगभग जीरो के बराबर होती है।
  • RMQC क्रेन, यानि वो विशाल क्रेन जो सीधे जहाज से कंटेनर उठाती है। CRMG क्रेन ट्रैक पर चलने वाली गैन्ट्री क्रेन, जो भारी से भारी कंटेनर बड़े आराम से उठा कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं।
  • NAVIS आधारित TOS यानी Terminal Operating System ये पोर्ट का दिमाग है। कौन सा कंटेनर कब आएगा। कहां जाएगा, कैसे हैंडल होगा। सबका पूरा नियंत्रण इस सिस्टम के हाथ में है।
  • हाई-टेक कंटेनर स्कैनर बिना कंटेनर खोले, अंदर क्या है सब पता लग जाता है। मतलब मशीनें ही मशीनें। वो भी इंटरनेशनल लेवल की। जो IIT मद्रास ने बनाया है।
  • ये सिस्टम AI, रडार और सेंसर की मदद से समंदर में चलने वाले हर जहाज की हर हरकत रियल-टाइम में ट्रैक करता है। कौन जहाज कहां है, कितनी स्पीड से है, कितनी दूरी पर है सब कुछ साफ है।

विजिन्हम की शान यहां की महिलाएं

यहां 9 महिलाओं की एक टीम है। और इनमें से 7 महिलाएं स्थानीय मछुआरा समुदाय से आती हैं। जो  दुनिया की पहली ऑटोमेटेड CRMG क्रेन  (क्रॉलर माउंटेड गैन्ट्री क्रेन) को ऑपरेट कर रही हैं।जो भारी-भरकम कंटेनरों को उठाकर ट्रैक पर चलाती हैं, और मिलीमीटर की सटीकता से उन्हें सही जगह रखती है। जहां कभी ये महिलाएं अपने घरों से दूर समुद्र में जाने वाले परिवार के साथ संघर्ष करती थीं। आज वही महिलाएं मिलियन-डॉलर मशीनें चला रही हैं। जोकि विझिंजम पोर्ट की सबसे बड़ी जीत है। टेक्नोलॉजी से बढ़कर लोगों को आगे बढ़ाना। यही असली विकास है।

ट्रांसशिपमेंट निर्भरता से मुक्ति की ओर भारत

आज भी भारत अपने लगभग 65–70% कंटेनर कार्गो को ट्रांसशिपमेंट के लिए सिंगापुर, दुबई और कोलंबो भेजता है। इससे समय और लागत दोनों बढ़ते हैं। लेकिन विजिन्हम इस निर्भरता को तोड़ने की दिशा में सबसे बड़ा कदम बनकर उभरा है। इसकी दो सबसे बड़ी मजबूती है।

  1. ईस्ट–वेस्ट शिपिंग रूट से मात्र 10 नॉटिकल मील दूरी
  2. 20 मीटर से अधिक प्राकृतिक गहराई—बिना ड्रेजिंग के मेगा वेसल्स की आसान डॉकिंग

मेगा शिप्स की पहली पसंद विजिन्हम

विजिन्हम की वैश्विक साख तब और बढ़ी जब पर्यावरण–अनुकूल MSC Türkiye के बाद दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज MSC IRINA पहली बार भारत में यहां डॉक करने आया। यह भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण था। ऐसे मेगा वेसल्स वही बंदरगाह चुनते हैं। जो लोकेशन, गहराई सुरक्षा, और संचालन क्षमता चारों मानकों पर विश्वस्तरीय हों। और विजिन्हम ने इसे सिद्ध कर दिया है।

भारत में पहली बार समुद्र में ही जहाजों को ईंधन सेवा

विजिन्हम बंदरगाह से भारत में पहली बार Ship-to-Ship (STS) बंकरिंग शुरू की है। अदाणी बंकरिंग द्वारा समुद्र में ही जहाजों को VLSFO ईंधन मुहैया कराया जाता है। इससे सीधा लाभ ये होता है कि, जहाजों का समय बचता है। लागत कम लगती है। इसके अलावा भारत को कोलंबो या अन्य विदेशी पोर्ट पर निर्भर नहीं रहना होगा।

भारत का सबसे आधुनिक बंदरगाह इन्फ्रास्ट्रक्चर

यह बंदरगाह दक्षिण भारत की लॉजिस्टिक रीढ़ बनने की क्षमता रखता है। विजिन्हम का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। जिसकी क्या विशेषताएं हैं इन पॉइंट में पढ़िए

  • 24×7 अत्याधुनिक कंटेनर यार्ड
  • विश्वस्तरीय नेविगेशन और सुरक्षा सिस्टम
  • 10.7 किमी नई रेल लाइन और देश की तीसरी सबसे लंबी रेल सुरंग से कनेक्टिविटी
  • हाई–स्पीड NH–66 कनेक्शन
  • भविष्य में बड़े विस्तार की संभावनाएं

रोजगार और विकास की नई लहर

विजिन्हम के आसपास का इलाका तेजी से बदल रहा है। यहां डॉक वर्कर, क्रेन ऑपरेटर, कस्टम स्टाफ सुरक्षा कर्मी, लॉजिस्टिक और प्रशासनिक कर्मचारी जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रोजगार बढ़ा है। वहीं अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसपोर्ट, होटल, वेयरहाउसिंग, पर्यटन और छोटे व्यापारों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। तिरुवनंतपुरम–विजिन्हम–कोवलम क्षेत्र एक उभरता शहरी–क्लस्टर बन चुका है।

PPP मॉडल की सफलता और बढ़ती अहमियत

केरल सरकार और अदाणी समूह की साझेदारी ने इसे भारत के सबसे सफल PPP मॉडल्स में शामिल कर दिया है। यह पोर्ट भारत की स्थिति को मजबूत करता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन की सक्रियता और कोलंबो पोर्ट पर उसकी पकड़ भारत के लिए चिंता का विषय रही है। भविष्य में यह पोर्ट भारतीय नौसेना के लिए भी लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर बन सकता है।

पर्यावरण संतुलन की दिशा में प्रयास

परियोजना पर पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं। तटीय सुरक्षा, पुनर्वास पैकेज, समुद्री पारिस्थितिकी की मॉनिटरिंग और मोबाइल हार्बर सुविधाएं इसके पर्यावरण–संतुलन मॉडल को मजबूत करती हैं।

2030 का लक्ष्य, भारत की नई समुद्री क्रांति

अनुमान है कि, 2030 तक विजिन्हम की क्षमता 5–7 मिलियन TEU सालाना तक पहुंच जाएगी। इससे  कोलंबो पर भारत की निर्भरता आधी रह जाएगी।दक्षिण भारत के निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। इसके अलावा तिरुवनंतपुरम दक्षिण भारत की नई लॉजिस्टिक राजधानी बनेगा।

भारत की समुद्री कहानी का नया अध्याय

अदाणी समूह और केरल सरकार की साझेदारी से बना विजिन्हम बंदरगाह भारत की समुद्री क्षमताओं का एक नया अध्याय लिख रहा है। यह बंदरगाह भारत की आर्थिक रणनीति, वैश्विक व्यापारिक आकांक्षाओं और समुद्री आत्मविश्वास का दमदार प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह न केवल भारत की आर्थिक गति बढ़ाएगा। बल्कि देश को भारतीय महासागर क्षेत्र में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।