30 साल टिकने का था दावा: 18 दिन भी नहीं टिका पिलर

30 साल टिकने का था दावा, 18 दिन भी नहीं टिका पिलर: निर्माणाधीन CM राइज स्कूल की छत गिरी, 4 मजदूर घायल

30 साल टिकने का था दावा: 18 दिन भी नहीं टिका पिलर

ग्वालियर: जिस सांदीपनि विद्यालय की निर्माणाधीन बिल्डिंग को 30 साल से ज्यादा चलने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है, उसका पिलर 30 दिन भी वजन नहीं सह सका और ढह गया। उसके चलते एक बड़ा हिस्सा भी भरभराकर कर गिर गया। निर्माण के दौरान छत का बड़ा हिस्सा गिरने से चार मजदूर घायल हो गए। पिलर निर्माण की तारीख 8 अक्टूबर 2026 दर्ज है, जबकि हादसा निर्माण के महज 18वें दिन ही सामने आ गया। अब सवाल है कि आखिर निर्माण में ऐसी कौन सी चूक हुई कि नया पिलर ही ढह गया? जो इतने बड़े हादसे का कारण बना।

मामला ग्वालियर के कंपू थाना क्षेत्र में पद्माराजे हाई सेकेंडरी स्कूल परिसर का है। जहां सांदीपनि विद्यालय के भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान अचानक छत का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। हादसे के वक्त मौके पर काम कर रहे चार मजदूर इसकी चपेट में आकर घायल हो गए। सूचना मिलते ही प्रशासन और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

गुणवत्ता पर उठे सवाल

हादसे में सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर खड़ा हो रहा है। जिस सरकारी भवन को दशकों तक इस्तेमाल के उद्देश्य से बनाया जा रहा है, उसका पिलर निर्माण के कुछ ही दिनों में ढह गया। पिलर पर दर्ज तारीख के मुताबिक, इसे 8 अक्टूबर 2026 को बनाया गया था और महज 18 दिन बाद ही इसके ढहने की घटना सामने आ गई। ऐसे में सवाल है कि क्या निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी? क्या तय मानकों के मुताबिक निर्माण कराया जा रहा था? और निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?

जांच के बाद होगी कार्रवाई

गनीमत रही कि हादसे के वक्त स्कूल में छुट्टी थी और स्टूडेंट परिसर में मौजूद नहीं थे। वरना यदि भवन के इस्तेमाल के दौरान ऐसी घटना होती, तो नतीजे कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते थे। फिलहाल पिलर और छत का हिस्सा गिरने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। निर्माण में तकनीकी खामी, सामग्री की गुणवत्ता या किसी अन्य कारण की भूमिका थी, यह जांच के बाद ही साफ होगा। इस मामले में तहसीलदार मनीष जैन ने जांच कराने की बात कही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब जरूरत सिर्फ हादसे की वजह पता लगाने की नहीं, बल्कि यह तय करने की भी है कि निर्माण कार्य में कहीं लापरवाही हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।