लोकतंत्र रक्षक सेनानी का निधन: राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, आपातकाल में 18 महीने जेल में रहे रामनरेश सिंह
मऊगंज के लोकतंत्र रक्षक सेनानी रामनरेश सिंह का 79 वर्ष की उम्र में निधन: आपातकाल में झेली थी जेल की यातना, पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी सलामी
मऊगंज से राजेंद्र पयासी की रिपोर्ट।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपातकाल के काले अध्याय में जेल की सलाखों के पीछे संघर्ष करने वाले विंध्य के वयोवृद्ध लोकतंत्र रक्षक सेनानी रामनरेश सिंह का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की निधन की सूचना मिलते ही पूरे अंचल में शोक की लहर दौड़ गई।

नवगठित मऊगंज जिले की नईगढ़ी तहसील अंतर्गत ग्राम छत्रगढ़ खुर्द के मूल निवासी रामनरेश सिंह ने साल 1975-77 के आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए डेढ़ वर्ष तक कारावास की यातना सही। मीसाबंदी के रूप में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाई और बाद में राष्ट्रीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सेनानियों के हितों के लिए सतत संघर्षरत रहे।

प्रशासन ने राजकीय सम्मान के साथ दी सलामी
शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने लोकतंत्र रक्षक सेनानी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। कलेक्टर राजेश कुमार ओगरे और पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई की उपस्थिति में जिला पुलिस बल मऊगंज की सशस्त्र टुकड़ी ने उनके गृह ग्राम छत्रगढ़ खुर्द पहुंचकर शोक सलामी दी और गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया।

इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने अश्रुपूरित नेत्रों से अमर सेनानी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस मौके पर कलेक्टर ने दिवंगत लोकतंत्र सेनानी के नाती प्रशांत सिंह को शासन के नियमानुसार सहायता राशि प्रदान की गई।

गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी के पश्चात पार्थिव देह को अंतिम संस्कार हेतु प्रयागराज ले जाया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चार औरसनातन परंपरा के अनुसार विधि-विधान पूर्वक अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
गौरवशाली विरासत को जोड़ने का प्रयास
रामनरेश सिंह का जीवन त्याग, सादगी और निस्वार्थ समाजसेवा का अनुपम उदाहरण था। उनका विवाह हुआ था, परंतु संतान सुख से वंचित रहे। धर्मपत्नी का गत वर्ष देहावसान हो चुका है। वे आजीवन संयुक्त परिवार में भाईयों और भतीजों के साथ रहे और परिवार को एकता के सूत्र में पिरोए रखा। वे अपने पोते प्रशांत सिंह को सदैव स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत से जोड़ने का प्रयास करते थे। उनकी अभिलाषा थी कि भावी पीढ़ी भी राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों की इस परंपरा को अक्षुण्ण रखे।

पोते प्रशांत सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि दादाजी स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ समाज के लिए मील के पत्थर थे। उनका जाना अपूरणीय क्षति है, किंतु उनके श्रेष्ठ कार्यों पर परिवार को गर्व है। भतीजे सरोज सिंह ने बताया कि वे आपातकाल के दौरान डेढ़ वर्ष तक जेल में रहे और लोकतंत्र रक्षकों के अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक लड़ते रहे।

गणमान्यजनों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा में कलेक्टर राजेश कुमार ओगरे, पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई, एसडीएम रश्मि चतुर्वेदी, जनपद सदस्य केसरी प्रसाद द्विवेदी, तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी, नायब तहसीलदार बबलेश तिवारी,पुलिस अधिकारी, राजस्व कर्मचारियों सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष नृपेन्द्र सिंह पिंटू ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रामनरेश सिंह राष्ट्र के गौरव थे। उन्होंने कभी भी लोकतंत्र रक्षक सेनानी होने का लाभ निजी स्वार्थ के लिए नहीं लिया। ऐसे महान त्यागी विभूतियों के परिवारों को शासन द्वारा विशेष प्रोत्साहन एवं सम्मान दिया जाना चाहिए।

निश्चित ही रामनरेश सिंह का भौतिक शरीर आज हमारे बीच नहीं है, परंतु लोकतंत्र के प्रति उनका अगाध प्रेम, त्याग और समर्पण युगों-युगों तक स्मरणीय रहेगा।

