Mohan Bhagwat CG Visit : RSS प्रमुख आज करेंगे BJP नेताओं संग मंथन, भागवत बोले - संघ सिर्फ हिंदुओं का नहीं, पूरे देश का है

Mohan Bhagwat CG Visit : बिलासपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को राष्ट्रहित, सद्भाव और संगठन विस्तार का संदेश दिया। बैठक में नई शाखाओं और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।

Mohan Bhagwat CG Visit : RSS प्रमुख आज करेंगे BJP नेताओं संग मंथन, भागवत बोले - संघ सिर्फ हिंदुओं का नहीं, पूरे देश का है

Mohan Bhagwat CG Visit : बिलासपुर, छत्तीसगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत छत्तीसगढ़ पहुंच गए हैं। RSS प्रमुख भागवत ने बिलासपुर में स्वयंसेवकों को राष्ट्रहित में काम करने और संगठन को मजबूत बनाने का संदेश दिया। गुरुवार को कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संघ स्वयंसेवकों से बड़ा है। उन्होंने संघ की तुलना समुद्र से करते हुए कहा कि जैसे समुद्र की पहचान उसकी बूंदों से होती है, वैसे ही स्वयंसेवकों से संगठन की पहचान बनती है। संघ का उद्देश्य पूरे राष्ट्र के हित में काम करना है।

आज बैठक में युवा संपर्क और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को संघ की दो सत्रों में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनमें आगामी कार्यक्रमों, युवा वर्ग को संगठन से जोड़ने और शाखाओं के विस्तार पर चर्चा होनी है। संघ और भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव को लेकर रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। 

दूसरे सत्र में भाजपा के पदाधिकारी, नेता और मंत्री शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में संघ के क्षेत्र संघ चालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना, प्रांत संघ चालक टोपलाल वर्मा सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। आयोजन के दौरान मीडिया के प्रवेश पर रोक थी और प्रतिभागियों के मोबाइल फोन भी बाहर जमा कराए गए थे। सुरक्षा के लिए 100 से अधिक जवान तैनात किए गए थे।

हिंदू समाज और राष्ट्र को एकजुट करना उद्देश्य

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि संघ केवल हिंदुओं के भले के लिए काम करता है, जबकि उसका उद्देश्य पूरे राष्ट्र का कल्याण करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि संघ का काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं है। संगठन शुद्ध प्रेम, सद्भाव और आपसी एकता के आधार पर समाज को जोड़ने का प्रयास करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने और अपने व्यवहार से संगठन की अच्छी छवि बनाए रखने की सलाह दी।

समुद्र और पानी के उदाहरण से समझाया संघ का महत्व

संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों और संगठन के संबंध को समझाने के लिए पानी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु से पानी बनता है। इसी तरह स्वयंसेवक मिलकर संघ का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि हर स्वयंसेवक को संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझना चाहिए। उनके अनुसार, संगठन की मजबूती के लिए व्यक्तिगत आचरण, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण जरूरी है।

पहले उपेक्षा हुई, अब संघ की जय-जयकार हो रही

डॉ. भागवत ने संघ की स्थापना के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 1925 में संगठन की स्थापना के बाद पहले उपेक्षा हुई, फिर विरोध हुआ और अब उसकी जय-जयकार हो रही है। उन्होंने कहा कि अनुकूल माहौल में भी स्वयंसेवकों को सतर्क रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने संपर्क अभियान को आगे बढ़ाने का लक्ष्य दिया। उनके अनुसार, स्वयंसेवक पहले किसी अनजान व्यक्ति से परिचय बढ़ाएं, फिर दोस्ती करें और उसके बाद उसे संघ से जोड़ने का प्रयास करें।

आंदोलन और विरोध संवैधानिक दायरे में हों

संघ प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना या समाज में नफरत फैलाना नहीं होना चाहिए। आंदोलन का मकसद समस्याओं का समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने सभी कार्यों को संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के भीतर करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के दौरान शुरू किए गए कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखना होगा। शाखाओं का विस्तार, परिवारों से संपर्क और समाज में अपनत्व बढ़ाना संगठन के प्रमुख कार्य हैं।

एक साल में 2311 नई शाखाएं शुरू होने का दावा

बौद्धिक वर्ग से पहले हुई बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने शताब्दी वर्ष के कार्यों की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि पिछले एक साल में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं और कुल संख्या बढ़कर 5500 हो गई है। रायपुर में पावभाजी बेचने वाले लोगों को जोड़ने के लिए रात में शाखा शुरू करने का उदाहरण भी साझा किया गया। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने अलग-अलग स्थानों पर नई शाखाएं शुरू करने की जानकारी दी।