वोटिंग से पहले अमेरिका का ईरान पर हमला: केश्म द्वीप पर 5 धमाके
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के केश्म द्वीप पर 5 धमाके हुए। अमेरिकी अधिकारियों ने होर्मुज स्ट्रेट में रक्षात्मक हमलों की जानकारी दी। ईरान ने अमेरिकी जासूसी ड्रोन गिराने का दावा किया।
America Iran Conflict : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की आशंका के बीच ईरान के केश्म द्वीप पर सोमवार को कम से कम पांच जोरदार धमाकों की खबर सामने आई। इसके अलावा बंदर लेंगेह शहर में भी विस्फोट होने की जानकारी मिली है। अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि इन हमलों के पीछे अमेरिका का हाथ है। वहीं, ईरानी मीडिया ने हमले के लिए अमेरिका या इजराइल की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
????????ब्रेकिंग न्यूज ???????? आखिरकार अमेरिका ने ईरान पर हमला कर ही दिया है। आज की रिपोर्ट के मुताबिक, हमला ईरान के क़ेश्म द्वीप पर हुआ है, जो सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित है। अमेरिका इसे रक्षात्मक कार्रवाई बता रहा है। ये हमले केवल सैन्य हमले तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि इसका असर पूरे मध्य-पूर्व, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
— Nexo (@TheNexoMedia) November 3, 2026
ईरान ने दो अमेरिकी जासूसी ड्रोन गिराने का किया दावा
ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने दो अमेरिकी जासूसी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को बताया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में कुछ ईरानी ठिकानों पर रक्षात्मक हमले किए हैं। हालांकि, हमले में हुए नुकसान और इसकी पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
अमेरिका के लिए क्यों अहम है केश्म द्वीप?
केश्म द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है, जो करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण इस द्वीप को ईरान के सैन्य और समुद्री नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, द्वीप के नीचे सुरंगों और नमक की गुफाओं का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। माना जाता है कि ईरान ने यहां तटीय मिसाइल सिस्टम और तेज हमला करने वाली नौकाओं को सुरक्षित रखने के लिए सैन्य ठिकाने बनाए हैं।
इसके अलावा, केश्म द्वीप की भौगोलिक स्थिति होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। दुनिया की तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
ट्रम्प ने कहा था- ईरान के साथ हो सकता है समझौता
हमलों की खबरों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा था कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर दोबारा हमला करने की तैयारी नहीं कर रहा है। उन्होंने ईरान के साथ समझौता होने की संभावना भी जताई थी।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमला किया जा सकता है, तो ट्रम्प ने जवाब दिया था- "नहीं।"
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान के साथ बड़े युद्ध की आशंका कम होने से तेल की कीमतों में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है। उनके मुताबिक, 31 अक्टूबर को तेल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 1 नवंबर को घटकर 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
नेतन्याहू पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाने का आरोप
AP की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू किए जाएं।
वहीं, पश्चिम एशिया के कई अमेरिकी सहयोगी देश ईरान पर नए हमलों के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि सैन्य कार्रवाई से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल केश्म द्वीप पर हुए धमाकों और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आने वाले समय में अमेरिका और ईरान की ओर से होने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

