दिल्ली की हवा में 30 सिगरेट जितना जहर: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- प्रदूषण रोकने के लिए क्या कर रहे हैं?

Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई। सुनवाई में हवा को 30 सिगरेट पीने जैसा बताया गया। कोर्ट ने गाड़ियों, पराली और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर सवाल किए।

दिल्ली की हवा में 30 सिगरेट जितना जहर: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- प्रदूषण रोकने के लिए क्या कर रहे हैं?

Delhi NCR Pollution: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर Supreme Court ने गंभीर चिंता जताई है। राजधानी की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील ने कहा कि NCR की हवा में सांस लेना रोजाना 30 सिगरेट पीने जैसा है। इस पर अदालत ने प्रदूषण के कारणों और इसे रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर सवाल किए।

शुक्रवार, 6 नवंबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण के मामले की सुनवाई की। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में वाहनों की बढ़ती संख्या और सड़कों पर लगने वाले जाम को प्रदूषण की बड़ी वजह बताया। चीफ जस्टिस ने कहा कि दिल्ली और आसपास के इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों पर बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक रहता है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली जलाना ही जिम्मेदार है या निजी गाड़ियों और बड़े वाहनों से होने वाला उत्सर्जन भी इसकी बड़ी वजह है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें कुछ वाहनों के प्रवेश पर रोक, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जियो-टैगिंग और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।

पराली जलाने पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान पराली जलाने का मुद्दा भी उठा। अदालत ने कहा कि किसानों को पराली के दूसरे इस्तेमाल और उसे न जलाने से होने वाले आर्थिक फायदे के बारे में जागरूक करना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि पराली की खरीद की कीमत पहले से घोषित की जाए और इसके प्रबंधन की व्यवस्था ग्राम पंचायतों तक पहुंचाई जाए।

केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि गुरुवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत थी। हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

स्कूल बंद करने पर विशेषज्ञों की राय को तरजीह

दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने पर स्कूलों को बंद करने और ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की मांग भी सुनवाई के दौरान उठी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह स्कूलों को लेकर कोई फैसला विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही करेगा। अदालत ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत तय उपायों और विशेषज्ञों की सिफारिशों को महत्व देने की बात कही।

AQI 400 के करीब, कई इलाकों में हवा गंभीर

6 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 389 से 391 के बीच दर्ज किया गया। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा कि AQI करीब 400 तक पहुंच रहा है, जबकि प्रदूषण रोकने के लिए लगातार कदम उठाए जाने की बात कही जाती है।

अदालत ने साफ किया कि सिर्फ प्रतिबंध लगाने और आदेश जारी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए तत्काल, मध्यम अवधि और लंबे समय के उपायों की जरूरत है। मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।