36 साल की सेवा के बाद भी सिर्फ एक पदोन्नति, बिजली कंपनी के वरिष्ठ अभियंताओं में नाराजगी
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 1989 और 1991 बैच के अभियंताओं ने 36 साल बाद भी पदोन्नति नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। वरिष्ठ अभियंताओं ने जल्द प्रमोशन देने की मांग करते हुए सामूहिक वीआरएस और आंदोलन की चेतावनी दी।
भोपाल। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में पदोन्नति को लेकर वरिष्ठ अभियंताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वर्ष 1989 और 1991 में कनिष्ठ यंत्री के पद पर नियुक्त अभियंताओं ने कंपनी प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखी हैं। उनका आरोप है कि 36 से 38 साल की सेवा के बाद भी उन्हें केवल एक पदोन्नति मिली है। वहीं, दूसरे संवर्ग के कई अधिकारी तीन तक पदोन्नतियां प्राप्त कर चुके हैं। अभियंताओं ने जल्द न्याय नहीं मिलने पर सामूहिक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने और आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
2011 के परिपत्र को यथावत रखने की मांग
अभियंताओं के अनुसार, ऊर्जा विभाग का 9 जून 2011 का परिपत्र मंत्रिपरिषद के 7 जून 2011 के आदेश के तहत जारी हुआ था। इसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद ऊर्जा विभाग ने 13 सितंबर 2021 को भी इस परिपत्र को यथावत रखने की पुष्टि की थी। कंपनी के लगभग 80 प्रतिशत अभियंताओं को इसका लाभ मिल चुका है। अब शेष 20 प्रतिशत पात्र अभियंताओं को भी पदोन्नति देने की मांग की जा रही है।
36 साल की सेवा के बाद भी पदोन्नति में असमानता
अभियंताओं ने सवाल उठाया है कि वर्ष 1989 और 1991 में नियुक्त कनिष्ठ यंत्रियों को लंबी सेवा के बाद भी केवल एक पदोन्नति मिली, जबकि उनके साथ नियुक्त सहायक अभियंता मुख्य अभियंता तक पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि उनसे लगभग 20 साल बाद नियुक्त कुछ कनिष्ठ अभियंता और ऑपरेटर भी सहायक अभियंता बन चुके हैं। ऐसे में वरिष्ठ कर्मचारियों की वरिष्ठता और अनुभव का सम्मान नहीं हो रहा है।
चालू प्रभार देने में भेदभाव का आरोप
अभियंताओं ने आरोप लगाया है कि मंडल संवर्ग के लिए आरक्षित पदों पर ऐसे कर्मचारियों को चालू प्रभार दिया जा रहा है, जो हालिया विभागीय पदोन्नति समिति में पात्र नहीं पाए गए। कुछ के खिलाफ लोकायुक्त प्रकरण, आरोप-पत्र या दंड संबंधी मामले लंबित होने की बात भी कही गई है। उनका कहना है कि अन्य संवर्गों में अर्हताकारी सेवा अवधि में छूट देकर उच्च पदों का चालू प्रभार दिया जा रहा है, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया जा रहा।
मांग पूरी नहीं हुई तो सामूहिक आंदोलन की चेतावनी
अभियंताओं का कहना है कि पदोन्नति या उच्च पद का चालू प्रभार देने से कंपनी पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर जल्द आदेश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार उपेक्षा से कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे सामूहिक रूप से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कंपनी और शासन के खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।



