विक्रमशिला पुल हादसा: 34 मीटर स्लैब गंगा में समाया, 16 जिलों से संपर्क टूटा, CM ने मांगी सेना की मदद

बिहार की लाइफलाइन बंद। भागलपुर में साल 2001 में बना विक्रमशिला सेतु का बड़ा हिस्सा बीच से टूटा। 34 मीटर स्लैब गंगा में गिरा। भागलपुर का सीमांचल समेत 16 जिलों से संपर्क टूटा।

विक्रमशिला पुल हादसा: 34 मीटर स्लैब गंगा में समाया, 16 जिलों से संपर्क टूटा, CM ने मांगी सेना की मदद

बिहार के भागलपुर में रविवार देर रात 4.7 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला सेतु का करीब 34 मीटर हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिर गया। प्रशासन ने पहले ही पुल पर यातायात बंद कर दिया था, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

16 जिलों की आवाजाही प्रभावित

इस घटना के बाद सीमांचल सहित लगभग 16 जिलों की आवाजाही प्रभावित हुई है। करीब एक लाख लोग रोजाना इस पुल का उपयोग करते हैं और इस हादसे से उनके सफर पर असर पड़ा है। पिछले 10 वर्षों में इस पुल की तीन बार मरम्मत हो चुकी है, जबकि हाल ही में मार्च 2026 में भी इसका मेंटेनेंस किया गया था। यह पुल यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन द्वारा बनाया गया था।

मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से बात

बिहार सीएम सम्राट चौधरी ने रक्षा मंत्री से बात की है और पुल की मरम्मत के काम में सेना की मदद लेने की कोशिश की जा रही है। साथ ही स्थानीय लोगों के आने-जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा रही है। मामले में लापरवाही सामने आने पर पथ निर्माण विभाग ने कार्यकारी इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। वहीं बिहार राज्य पुल निगम लिमिटेड के अध्यक्ष ने कहा कि प्रशासन की सतर्कता से बड़ी दुर्घटना टल गई, वरना जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। उन्होंने यह भी बताया कि मेंटेनेंस के लिए डीपीआर पहले ही भेजा जा चुका था।

गैप बढ़ते ही अलर्ट, प्रशासन की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

पहले 10 इंच का जॉइंट सस्पेंशन शाम को धंसा और धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ती गई। इसके बाद देर रात एक स्लैब गंगा नदी में समा गया। उस समय पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी थी, लेकिन पुलिस की समय पर सतर्कता  से बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल पुल निगम के अधिकारी इस  मामले की जांच में जुटे हैं। डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि रात 12:35 बजे के बाद स्लैब धंसना शुरू हुआ था, लेकिन उससे पहले ही वाहनों को वहां से हटा दिया गया था, जिससे किसी तरह की दुर्घटना नहीं हुई। ट्रैफिक डीएसपी संजय कुमार ने बताया कि स्ट्रीट लाइट पोल नंबर 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट में गैप बढ़ने की सूचना मिलते ही दोनों ओर से वाहनों का आवागमन तुरंत रोक दिया गया था।

16 जिलों की कनेक्टिविटी ठप

भागलपुर का विक्रमशिला सेतु सीमांचल सहित 16 जिलों को जोड़ता है, जहां रोजाना करीब 1 लाख लोग और 50 हजार वाहन गुजरते हैं। लगातार तकनीकी समस्याओं और गैप की शिकायतों के बीच 2020 में इस पुल की आखिरी मरम्मत हुई थी। पुल बंद होने के बाद अब लोग गंगा पार करने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं, जिससे बरारी घाट पर भारी भीड़ उमड़ रही है। नवगछिया, कटिहार और पूर्णिया जाने वाले यात्रियों को लंबा और कठिन सफर करना पड़ रहा है। वहीं, विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पहले ही चेतावनी देने का दावा किया है।

विक्रमशिला सेतु में पहले से थी समस्या

करीब 30 दिन पहले पिलर नंबर 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव से टूट गई थी। इंजीनियरों ने उस समय नदी के बहाव और भारी नावों के दबाव को इसकी वजह बताया था। इसके अलावा पुल के एक्सपेंशन जॉइंट में भी गैप 1–2 इंच से बढ़कर करीब 6 इंच तक पहुंच गया था, जिससे पहले से ही खतरे के संकेत मिल रहे थे।