मऊगंज जिले के वधैया गांव की बदहाल तस्वीर, प्रशासन की अनदेखी पर ग्रामीणों में आक्रोश

मऊगंज जिले की हनुमना तहसील के बधैया गांव में वर्षों पुराने आम रास्ते को अवैध रूप से बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों की समस्याएं चरम पर हैं। हाल ही में एक बीमार महिला को अस्पताल से घर लाने के लिए परिजनों को कीचड़ भरे रास्ते में खाट का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि मुख्य रास्ता कंटीली तारों से घेरकर बंद कर दिया गया था।

मऊगंज जिले के वधैया गांव की बदहाल तस्वीर, प्रशासन की अनदेखी पर ग्रामीणों में आक्रोश

पब्लिक वाणी मऊगंज

जिले के हनुमना तहसील अंतर्गत बधैया गांव से प्रशासनिक एवं जनप्रतिनिधियों के अनदेखी और ग्रामीणों की बदहाली की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। गांव के वर्षों पुराने आम रास्ते को अवैध रूप से बंद कर दिए जाने के चलते एक बीमार महिला को अस्पताल से घर चारपाई के सहारे लाना पड़ा। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

घटना के समझ में मिली जानकारी के अनुसार, स्थानी गांव निवासी सुरेंद्र पांडेय के बहू की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें संजय गांधी अस्पताल, रीवा में भर्ती कराया गया था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब परिजन वाहन से उन्हें घर ला रहे थे, तब गांव का मुख्य रास्ता बंद मिला। वाहन अंदर नहीं पहुंच सका, और मजबूरन परिजनों को खाट का सहारा लेना पड़ा। कीचड़ और पानी से भरे रास्ते में महिला को कंधों पर खाट उठाकर गांव के भीतर लाया गया।

वर्षों पुराना रास्ता तारों से घेरकर किया गया बंद-

 पीड़ित सुरेंद्र पांडेय ने बताया कि यह रास्ता कई पीढ़ियों से ग्रामीणों की आवाजाही के लिए प्रयोग में लाया जा रहा था, लेकिन अब गांव के ही छबिलाल सेन और बिजेंद्र मिश्रा द्वारा इस पर कंटीली तारें लगाकर बंद कर दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रास्ता बंद होने से 6 से 7 परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। गांव का रास्ता बंद होने से परेशान ग्रामीणों ने बताया कि अवैध रूप से तारवाड़ी कर लिए जाने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, मवेशी घर में बंद हैं और बीमारों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो गया है।

प्रशासन को कई बार बताया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सुरेंद्र पांडेय ने बताया कि इस संबंध में तहसील कार्यालय, थाने और अपर कलेक्टर को पूर्व में कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

5 अगस्त को उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर एक बार फिर शिकायत दर्ज कराई, पर वे कलेक्टर से मुलाकात नहीं कर सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने रास्ता खोलने की कोशिश की तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। 

ग्रामीणों में आक्रोश-

इधर वीडियो में जिस प्रकार कीचड़ भरे रास्ते से खाट उठाकर बीमार महिला को ले जाते देखा गया है, उसने सरकारी तंत्र की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है। गांव के अन्य प्रभावित परिवारों ने भी प्रशासन से आम रास्ते को तत्काल बहाल करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि  कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम सब एकजुट होकर धरना प्रदर्शन एवं जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।