भारत की शर्मनाक हार के बाद कोच पर उठे सवाल, गौतम गंभीर के बचाव में उतरे सुनील गावस्कर
गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली 408 रनों की करारी शिकस्त के बाद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर को हटाने की मांग जोर पकड़ चुकी है. यह घरेलू मैदान पर रनों के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी टेस्ट हार है.
गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली 408 रनों की करारी शिकस्त के बाद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर को हटाने की मांग जोर पकड़ चुकी है. यह घरेलू मैदान पर रनों के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी टेस्ट हार है. साथ ही 13 महीनों में दूसरी बार भारत को घरेलू टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप झेलना पड़ा है. स्टेडियम से लेकर सोशल मीडिया तक “गंभीर हाय-हाय” के नारे गूंजते रहे..
लेकिन इस बीच भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर गंभीर के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं. उन्होंने आलोचकों को कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सिर्फ टीम के खराब प्रदर्शन के बाद ही कोच को निशाना बनाना गलत है.
गावस्कर ने गंभीर के बचाव में क्या कहा?
इंडिया टुडे से बातचीत में गावस्कर ने कहा कि जब गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया ने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जीते थे, तब किसी ने उनकी तारीफ नहीं की थी. इसलिए अब हार के बाद उन्हें कटघरे में खड़ा करना किसी तरह न्यायसंगत नहीं है.
गावस्कर ने कहा—
“कोच टीम को तैयार कर सकता है, अपना अनुभव साझा कर सकता है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन खिलाड़ियों को करना होता है. जब गंभीर की अगुवाई में टीम ने खिताब जीते थे, तब आपने क्या किया था? तब किसी ने नहीं कहा कि उनका कॉन्ट्रैक्ट बढ़ा दो। फिर अब हटाने की मांग क्यों?” उन्होंने आगे कहा कि आलोचना का निशाना कोच नहीं बल्कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर होना चाहिए.
तीनों फॉर्मेट में एक ही कोच होना चाहिए: गावस्कर
गावस्कर ने यह भी कहा कि गंभीर तीनों फॉर्मेट में हेड कोच बने रहते हैं, तो इसमें कोई समस्या नहीं है. उन्होंने इंग्लैंड के कोच ब्रेंडन मैक्कलम का उदाहरण देते हुए कहा कि वे साढ़े तीन साल से इंग्लैंड टीम की सभी फॉर्मेट में कोचिंग कर रहे हैं.
गावस्कर के अनुसार
कई देशों में एक ही कोच तीनों फॉर्मेट को संभालता है. लेकिन हम सिर्फ टीम के हारने पर कोच को निशाना बनाते हैं.अगर आप गंभीर को खिताब जीतने का क्रेडिट नहीं दे रहे, तो हार का ठीकरा उन पर फोड़ना भी गलत है.
टेस्ट में संघर्षरत टीम इंडिया
गंभीर के कार्यकाल में टीम इंडिया टेस्ट फॉर्मेट में लगातार अस्थिर रही है. अब तक खेले गए 19 टेस्ट मैचों में भारत ने केवल 7 जीते हैं. 10 मैचों में हार झेलनी पड़ी है. सिर्फ 2 टेस्ट ड्रॉ हुए हैं. जीत प्रतिशत मात्र 37%. बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम ने घर पर 2-0 से सीरीज़ जीती. लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0 और अब साउथ अफ्रीका से 2-0 से क्लीन स्वीप.
गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट में टीम इंडिया लगातार संघर्ष करती नज़र आई है. टीम ने अब तक सिर्फ 7 मैच जीते हैं. उन्हें 10 में हार का सामना करना पड़ा है. 19 टेस्ट में से उनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने अब तक सिर्फ 2 टेस्ट ही ड्रॉ कराए हैं. उनकी अगुवाई में टीम का जीत प्रतिशत 37% ही है. बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के खिलाफ तो घर पर टीम ने 2-0 से मुकाबले जीते. लेकिन, न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0 और अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ टीम का 2-0 से सूपड़ा साफ हो गया है.
shivendra 
