मऊगंज जिला अस्पताल बना लापरवाही का अड्डा,आउटसोर्स डी ग्रेट कर्मचारी के हाथों मरीजों की जान दांव पर

मऊगंज जिला अस्पताल बना लापरवाही का अड्डा, आउटसोर्स डी ग्रेट कर्मचारी के हाथों मरीजों की जान दांव पर आउटसोर्स मल्टी टास्क महिला वर्कर का इंजेक्शन लगाते और सलाइन चढ़ाते वीडियो वायरल, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

मऊगंज जिला अस्पताल बना लापरवाही का अड्डा,आउटसोर्स डी ग्रेट कर्मचारी के हाथों मरीजों की जान दांव पर

राजेंद्र पयासी मऊगंज: को जिला बने तीन साल पूरे होने जा रहे हैं लेकिन जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही। गुरुवार को अस्पताल के जनरल वार्ड से एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी। 
वीडियो में तथाकथित डी-ग्रेड आउटसोर्स की एक महिला कर्मचारी बेखौफ मरीजों को इंजेक्शन लगाती और सलाइन की बोतल चढ़ाती नजर आ रही है। कैमरे में कैद हुई महिला एक-दो नहीं, बल्कि लाइन से कई मरीजों का इलाज कर रही थी।

आउटसोर्स मल्टी टास्क वर्कर कर्मचारी बनी डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर कहां गईं?

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि यह कोई पहला मौका नहीं है। अस्पताल में सफाई और सहयोगी कार्यों के लिए रखी गई यह महिला अक्सर नर्सिंग ऑफिसर का काम करती दिखती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी में एक गैर-अधिकृत कर्मचारी मरीजों को इंजेक्शन कैसे लगा रही थी? जबकि बिना ट्रेनिंग के सुई लगाना या आईवी चढ़ाना मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है। गलत तरीके से इंजेक्शन देने पर इंफेक्शन, रिएक्शन या सदमे से मौत तक हो सकती है।

अफसरों में हड़कंप, जांच के आदेश
 
वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रद्युम्न शुक्ला ने कहा कि जांच की जा रही है कि महिला किसके आदेश पर यह काम कर रही थी। 
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा वीडियो संज्ञान में आया है। प्रथम दृष्टया यह गलत है। उन्होंने सीएमएचओ डॉ. यत्नेश त्रिपाठी को तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं सीएमएचओ डॉ यत्नेश त्रिपाठी ने कहा युक्त मामला संज्ञान में आया है कलेक्टर सर द्वारा भी जांच कार्यवाही हेतु निर्देश जारी किए गए है जिसके परिपालन में जांच टीम गठित की गई है जांच उपरांत जो तथ्य सामने आएंगे उस हिसाब से वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

सिर्फ मऊगंज नहीं, पूरे जिले का हाल बेहाल
 
यह हाल सिर्फ जिला अस्पताल का नहीं है। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सफाईकर्मी घायलों की मरहम-पट्टी और टांके लगाते देखे गए हैं। कई जगह तो फार्मासिस्ट, दवा वितरक और नर्सिंग स्टाफ ही डॉक्टर बने बैठे हैं, कई जगह तो रात के दौरान यही कर्मचारी पूर्ण रूपेण चिकित्सा का काम करते हैं।
अब सवाल उठ रहा है कि मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? लोगों की मांग है कि वरिष्ठ अधिकारी अचानक निरीक्षण करें, तभी अस्पतालों की असली हकीकत सामने आएगी। फिलहाल सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।