रैंकिंग चमकाने CM हेल्पलाइन में पुलिस ने खुद ही करा दी 233 फर्जी शिकायतें
21 मोबाइल से 233 फर्जी शिकायतें, सीएम हेल्पलाइन में रैंकिंग चमकाने कराई फर्जी शिकायतें,तुरंत किया समाधान भी
राजेंद्र पयासी मऊगंज: सीएम हेल्पलाइन-181 में नंबर-1 बनने की होड़ में मऊगंज पुलिस ने कानून को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। थाना पुलिस ने खुद फरियादी बनकर 21 मोबाइल नंबरों से 233 फर्जी शिकायतें दर्ज कराईं और कागजों पर ही उनका ‘संतुष्टिपूर्वक’ निपटारा भी दिखा दिया। इसी फर्जीवाड़े के दम पर मार्च 2026 की सरकारी रैंकिंग में मऊगंज जिला ए-ग्रेड पाकर प्रदेश के टॉप-5 जिलों में शामिल हो गया था।

जांच में परत दर परत हुए खुलासे
सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया का है। पुलिस रिकॉर्ड में उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका के स्कूल से लापता होने की शिकायत दर्ज मिली, जबकि अंकित कुंवारे हैं। अंकित ने बताया, शादी ही नहीं हुई तो 20 साल की बेटी कहां से आई। फर्जीवाड़े का पैटर्न भी साफ दिखा। सौरभ द्विवेदी के नाम पर 4 मिनट में 5 अलग शिकायतें दर्ज हुईं। पहली शिकायत सुबह 11:30 बजे, फिर अगले तीन मिनट में चार और केस सिस्टम में चढ़ा दिए गए। इसी तरह अनीता साकेत के नाम पर 6 मिनट में 5 शिकायतें दर्ज कर दी गईं। सुबह 5:01 बजे पहली शिकायत, फिर कुछ ही मिनटों में चार और।

23 मई 2026 का मामला सबसे गंभीर है। ड्राइवर दयाशंकर तिवारी के मोबाइल से ‘रीता पांडेय बनकर एक ही दिन में 5 संगीन शिकायतें की गईं। इनमें घर में चोरी, एक्सीडेंट केस की डायरी कोर्ट में न भेजना, छेड़खानी के आरोपी को न पकड़ना, बच्चों के गुम होने पर कार्रवाई न करना और पीएम रिपोर्ट न देना शामिल था। हैरानी की बात कि 3 जून को सभी शिकायतें सहमति से बंद दिखा दी गईं। रिकॉर्ड खंगालने पर पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए, पुलिसकर्मी विवेक यादव के नाम पर 5 शिकायतें मिलीं। डायल-112 के कर्मचारी प्रवेश चतुर्वेदी और कृष्णा कुशवाहा के नाम भी फरियादी के तौर पर दर्ज हैं।

सिंडिकेट का सबसे बड़ा चेहरा थाना प्रभारी का प्राइवेट चालक
इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा चेहरा थाना प्रभारी का निजी ड्राइवर दयाशंकर तिवारी निकला। वह थाने का ‘फिक्स पॉकेट गवाह’ है। उसे 100 से ज्यादा आपराधिक मामलों में गवाह बनाया गया। हद तब हुई जब 24 सितंबर 2025 को एक ही दिन 9 अलग-अलग गांवों में अवैध शराब जब्ती के केसों में उसे गवाह दर्शाया गया। सभी मामलों में ‘सफेद झोले से 20 क्वार्टर शराब’ जब्त होने का एक जैसा विवरण लिखा गया। खुलासे के बाद प्रशासन हरकत में आया। थाना प्रभारी रीना सिंह को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। आरक्षक विवेक यादव को लाइन अटैच कर दिया गया है। ड्राइवर दयाशंकर को भी थाने से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने कहा,पूरे मामले की जांच एसडीओपी को सौंपी गई है। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। वहीं ड्राइवर दयाशंकर ने सफाई दी, मैंने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत नहीं की। थाने में कोई मोबाइल मांग लेता है, उस समय कुछ हुआ होगा। केसों में गवाह बनाने की जानकारी भी नहीं है। यह पूरा खेल रैंकिंग सुधारने के लिए रचा गया। पुलिस ने शिकायतकर्ता, गवाह और समाधानकर्ता की भूमिका खुद निभाकर सिस्टम का मजाक बना दिया। अब जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है।

