चौकीदार ही निकला बाघ का शिकारी, लाश पर उग आई थी घास

दो माह से गुनाह की पहरेदारी,चौकीदार ही निकला शिकारी बाघ की लाश पर उग आई थी घास, खोदी गई कब्र तो कांप उठा जंगल सुअर के शिकार के लिए बिछाए करंट में हुई थी मौत, शव दफनाकर मिटाए सबूत वन चौकीदार के परिवार तक पहुंची जांच, कब्र से मिले अवशेष

चौकीदार ही निकला बाघ का शिकारी, लाश पर उग आई थी घास

सतना: सरभंगा का जंगल दो महीने तक एक ऐसा राज अपने सीने में दबाए रहा, जिसे जानकर वन विभाग के अधिकारी भी सन्न रह गए। जहां बारिश के बीच घास लहलहा रही थी, वहीं नीचे एक बाघ का शव दफन था। आरोप है कि जंगली सुअर के शिकार के लिए लगाए गए बिजली के करंट में बाघ की मौत हो गई थी। इसके बाद शव को गड्ढा खोदकर दफना दिया गया ताकि किसी को भनक न लगे। 3 जुलाई को आरोपी की निशानदेही पर जब कब्र खोदी गई तो सिर्फ बाघ के अवशेष ही नहीं मिले बल्कि जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े हो गए।

सतना वनमंडल को करीब पांच दिन पहले एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि मझगवां वन परिक्षेत्र के सरभंगा जंगल में दो माह पहले एक बाघ की करंट लगने से मौत हो गई थी। घटना के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए उसका शव जंगल में ही दफना दिया गया था। सूचना इतनी गंभीर थी कि वन विभाग ने बिना किसी शोर-शराबे के जांच शुरू की और पूरे मामले को गोपनीय रखा। वन अधिकारियों ने पहले अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। कई दिनों तक अलग-अलग स्तर पर सूचनाएं जुटाई गईं और संभावित स्थानों की पहचान की गई। जब शुरूआती जांच में सूचना सही होने के संकेत मिले तो गुरुवार को बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता दल, वन परिक्षेत्र अधिकारी रंजन सिंह परिहार सहित कई अधिकारी पूरे दिन जंगल छानते रहे। लेकिन लगातार बारिश, घने लैंटाना और सटीक स्थान की जानकारी नहीं होने के कारण टीम खाली हाथ लौट आई।

रात की सूचना ने बदल दी जांच की दिशा

गुरुवार देर रात मुखबिर ने वन विभाग को एक और अहम जानकारी दी। इस बार शक की सुई सीधे सरभंगा क्षेत्र में तैनात वन चौकीदार मिन्टा सिंह गोंड की ओर घूम गई। शुक्रवार सुबह उपवनमंडल अधिकारी अभिषेक तिवारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी रंजन सिंह परिहार और अन्य अधिकारियों ने चौकीदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरूआती पूछताछ में ही पूरा घटनाक्रम सामने आ गया। आरोप है कि करीब दो महीने पहले कुछ लोगों ने जंगली सुअर का शिकार करने के लिए जंगल में बिजली का करंट बिछाया था। उसी करंट की चपेट में एक वयस्क बाघ आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बाघ की मौत होते ही आरोपी घबरा गए। उन्हें पता था कि मामला सामने आया तो गंभीर कानूनी कार्रवाई होगी। इसलिए उन्होंने जंगल में ही गड्ढा खोदा और शव को मिट्टी में दफना दिया।

टुकडे-टुकडे में निकली लाश

पूछताछ के बाद वन विभाग की टीम आरोपी की निशानदेही पर करारिया बीट के कम्पार्टमेंट क्रमांक पीएफ-820 पहुंची। जिस जगह खुदाई शुरू हुई वहां पहली नजर में कुछ भी असामान्य नहीं दिख रहा था। बारिश के कारण वहां घास उग चुकी थी और ऐसा लग रहा था जैसे जमीन ने दो महीने पुराने इस राज को पूरी तरह ढंक लिया हो। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, मिट्टी के नीचे से बाघ के कंकाल, हड्डियां और अन्य अवशेष (टुकडे)मिलने लगे। मौके पर मौजूद अधिकारी भी कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए।

विशेषज्ञ टीम ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य

बरामद अवशेषों को सरभंगा वन विश्राम गृह लाया गया। मुकुंदपुर जू से वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता और उनकी टीम मौके पर पहुंची। विशेषज्ञों ने अवशेषों की जांच कर डीएनए और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण के लिए नमूने सुरक्षित किए। इसके बाद वन संरक्षक अनुराग कुमार, वनमंडल अधिकारी मयंक चांदीवाल, उपवनमंडल अधिकारी अभिषेक तिवारी, तहसीलदार हिमांशु शुक्ला और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ के अवशेषों का अंतिम संस्कार किया गया।

जांच वन अमले तक पहुंची

वन विभाग के अनुसार मामले में दो अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है जबकि कुछ आरोपी अभी फरार हैं। सभी की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जंगल की सुरक्षा में तैनात चौकीदार और उसके परिवार का नाम जांच में सामने आया है। इससे वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।