एक दशक से अधूरा पड़ा सीवरेज प्लांट, नदियों में रोजाना 70 लाख लीटर जहर घुल रहा

रीवा में गंदे पानी को साफ करने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट वर्षों से अधूरे हैं, जिससे रोज लाखों लीटर गंदा पानी बीहर और बिछिया नदी में जा रहा है।

एक दशक से अधूरा पड़ा सीवरेज प्लांट, नदियों में रोजाना 70 लाख लीटर जहर घुल रहा

बीहर और बिछिया नदी को साफ करने के लिए जो गंदे पानी का ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना था, वो पिछले कई सालों से अधूरा पड़ा है। सरकार से करोड़ों रुपये मिले, योजनाएं बनीं, लेकिन नगर निगम की लापरवाही की वजह से ये काम अब तक पूरा नहीं हो सका। नतीजा ये है कि हर दिन नदियां और ज्यादा गंदी होती जा रही हैं।

करीब 10 साल पहले अमृत योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन अब तक सिर्फ 200 केएल क्षमता वाला एक छोटा प्लांट ही चालू हो पाया है। बाकी बड़े प्लांट आज भी अधर में लटके हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि 13 साल पहले जयंती कुंज में बना सबसे बड़ा प्लांट आज तक शुरू नहीं हो पाया। अब नगर निगम इसे फिर से टेंडर में देने की तैयारी कर रहा है।

योजनाएं आईं, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ

नदियों को गंदे पानी से बचाने के लिए पहले नेशनल रिवर कंजरवेशन प्रोजेक्ट लाया गया था। इसके तहत जयंती कुंज में प्लांट बनाया गया, जो बनकर तैयार तो हो गया लेकिन चला नहीं।

इसके बाद 2016 में अमृत योजना आई, जिसमें रीवा के कई सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शामिल किए गए। जयंती कुंज वाला प्लांट भी इसी योजना में जोड़ दिया गया। तब से ये पूरा प्रोजेक्ट नगर निगम के पास है, लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है।

इस देरी की वजह से नदियों में रोज शहर का गंदा पानी मिल रहा है और वे साफ नहीं हो पा रही हैं।

रोज 70 लाख लीटर गंदा पानी नदियों में जा रहा

रीवा शहर में रोज करीब 230 लाख लीटर पानी घरों में सप्लाई होता है। इसमें से लगभग 70 लाख लीटर पानी इस्तेमाल के बाद नालियों के जरिए सीधे बीहर और बिछिया नदी में चला जाता है। यही गंदा पानी नदियों को जहरीला बना रहा है। इसे रोकने के लिए ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और पाइपलाइन बिछाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन काम समय पर पूरा नहीं हो सका।

11 बड़े नाले सीधे नदियों में गिरते हैं

रीवा शहर से दो नदियां गुजरती हैं — बीहर और बिछिया। इन दोनों नदियों में शहर के 11 बड़े नाले सीधे आकर मिलते हैं। इसके अलावा 50 से ज्यादा छोटे नाले भी हैं।

इन नालों से सबसे ज्यादा नुकसान बिछिया नदी को हो रहा है। बिछिया का पानी कई इलाकों में काला और बेहद गंदा हो चुका है। वहीं बीहर नदी में बाणसागर का पानी मिलने से वह कुछ हद तक खुद को साफ कर लेती है।

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड भी भेज चुका है नोटिस

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कई बार नगर निगम को नोटिस भेज चुका है, लेकिन नगर निगम की ओर से न तो सही जवाब दिया जा रहा है और न ही ठोस कार्रवाई हो रही है। अधिकारी जानकारी देने से भी बचते रहते हैं।

37 एमएलडी क्षमता के प्लांट बनने हैं

कुल मिलाकर 37 एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ वायाघाट में 200 केएल का छोटा प्लांट ही चालू हो पाया है। विवेकानंद और बिछिया में प्लांट का सिविल काम पूरा हो चुका है, बस बिजली कनेक्शन का काम बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि बिजली मिलते ही प्लांट शुरू कर दिए जाएंगे।

कहां-कहां कितनी क्षमता के प्लांट बन रहे हैं

  • बाबाघाट – 200 केएल
  • निपनिया – 400 केएल
  • विवेकानंद – 6.5 एमएलडी
  • बिछिया – 6.5 एमएलडी
  • एजी कॉलेज – 9 एमएलडी
  • जयंती कुंज – 12 एमएलडी