जिला पंचायत में भ्रष्टाचार का खुलासा, फाइलें दबाकर करते हैं सौदेबाजी

रीवा जिला पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा क्रमांक-2 के कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि पंचायतों में घोटालों की जांच को जिला पंचायत के बाबू और कर्मचारी जानबूझकर बाधित करते हैं।

जिला पंचायत में भ्रष्टाचार का खुलासा, फाइलें दबाकर करते हैं सौदेबाजी

रीवा। जिला पंचायत रीवा में फैले भ्रष्टाचार को लेकर अब खुद सरकारी अफसरों की ज़ुबान खुलने लगी है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा क्रमांक-2  के कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे पंचायतों में हो रहे घोटालों की जांच में बाधा पहुंचाने वालों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में रावत साफ तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि जिला पंचायत के कर्मचारी और बाबू अब दलाल की भूमिका निभा रहे हैं।

ये जांच रिपोर्ट दबाकर रखते हैं और फिर सौदेबाज़ी करते हैं। फाइलें बंद कर दी जाती हैं, और भ्रष्ट सरपंचों व सचिवों को अभयदान मिल जाता है। रावत का कहना है कि जिला पंचायत में पदस्थ बाबू ही जांच कार्यवाही में सबसे बड़ी बाधा हैं। वे एक ही मामले की बार-बार जांच करवाते हैं, जिससे न तो निष्कर्ष निकलता है और न ही किसी पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

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अंततः शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी दोनों थककर बैठ जाते हैं। वीडियो में कार्यपालन यंत्री ने दावा है कि जनपद पंचायत नईगढ़ी की जिलहंडी पंचायत का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां 68 लाख रुपये के भ्रष्टाचार की शिकायत हुई थी, लेकिन उसे कथित रूप से 56 हजार रुपये में सुलझा दिया गया।

रावत खुद वीडियो में कहते सुनाई दे रहे हैं कि यहां पैसे लेकर जांच को प्रभावित किया जाता है, जांच रिपोर्ट बदल दी जाती हैं और फाइलें दबा दी जाती हैं। उन्होंने पीड़ितों को सुझाव देते हुए कहा कि अब यहां से कुछ नहीं होगा, आपको सीधे हाईकोर्ट जाना चाहिए। 

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जांच के नाम पर दिखावा, कार्रवाई ठप

रावत के अनुसार, जिला पंचायत में बड़ी संख्या में ऐसी जांच रिपोर्ट पड़ी हैं जिन पर वर्षों से कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि कई पंचायतों में हुई जांच के बावजूद भ्रष्ट अधिकारियों को पहले जैसे वित्तीय अधिकार वापस दे दिए गए हैं, और कार्रवाई की जगह उन्हें इनाम मिला है।

हालांकि वीडियो में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया गया, लेकिन रावत की यह स्वीकारोक्ति कि जिला पंचायत के अंदर भ्रष्टाचार का गहरा जाल फैला है, पूरे सिस्टम की सच्चाई उजागर करती है।