भोपाल में कांग्रेस का सत्याग्रह: गेहूं खरीदी में तकनीकी अड़चनों और किसानों की समस्याओं को लेकर 24 घंटे का उपवास

भोपाल के रोशनपुरा चौराहा स्थित जवाहर भवन के बाहर कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक 24 घंटे का उपवास कर रहे हैं। इस सत्याग्रह को किसानों की समस्याओं के समर्थन में आयोजित किया है।

भोपाल में कांग्रेस का सत्याग्रह: गेहूं खरीदी में तकनीकी अड़चनों और किसानों की समस्याओं को लेकर 24 घंटे का उपवास

भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी प्रक्रिया को लेकर किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। उपार्जन पोर्टल की तकनीकी खामियों, पंजीयन और स्लॉट बुकिंग की समस्याओं तथा विभिन्न शर्तों के कारण किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस सेवादल ने भोपाल में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।

जवाहर भवन के बाहर सत्याग्रह

भोपाल के रोशनपुरा चौराहा स्थित जवाहर भवन के बाहर कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव 24 घंटे का उपवास कर रहे हैं। इस सत्याग्रह को किसानों की समस्याओं के समर्थन में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए हैं।

इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह चौहान और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। आसपास के जिलों से किसानों को भी इस आंदोलन में शामिल होने के लिए बुलाया गया है।

किसानों की प्रमुख समस्याएं

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गेहूं उपार्जन प्रणाली में लगातार तकनीकी बाधाएं आ रही हैं। किसानों को स्लॉट बुकिंग के दौरान “सैटेलाइट वेरिफिकेशन” और आधार लिंकिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि पंजीयन होने के बावजूद उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है।

इसके अलावा, 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के लिए अलग व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी है। किसानों का आरोप है कि सरकार की नीतियां भेदभावपूर्ण हैं और छोटे किसानों को अधिक परेशान किया जा रहा है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री “दाना-दाना गेहूं खरीदने” का वादा करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को कई अड़चनों का सामना करना पड़ता है। साथ ही सवाल उठाया कि जब सरकार ने अभी तक किसानों का गेहूं खरीदा ही नहीं है, तो उन्हें डिफॉल्टर कैसे घोषित किया जा रहा है। साथ ही, पूरे साल का ब्याज वसूलने को उन्होंने अनुचित बताया।

कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की है कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए। किसानों के हित में नीति में सुधार करने की भी मांग की गई है, ताकि उन्हें समय पर और बिना परेशानी के अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सके।