शाजापुर: 4 साल पुराने नोटिस के बाद भी नहीं हटा अवैध व्यावसायिक निर्माण, प्रशासन पर उठे सवाल

शाजापुर के हरायपुरा रोड पर वर्ष 2021 में नोटिस जारी होने के बावजूद अवैध व्यावसायिक निर्माण पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। 12 फीट सड़क पर बने निर्माण से जाम और हादसों का खतरा बढ़ा, प्रशासन की भूमिका पर सवाल।

शाजापुर: 4 साल पुराने नोटिस के बाद भी नहीं हटा अवैध व्यावसायिक निर्माण, प्रशासन पर उठे सवाल

शाजापुर। शहर के हरायपुरा रोड स्थित वार्ड क्रमांक 17 में एक अवैध व्यावसायिक निर्माण का मामला स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नगर पालिका परिषद शाजापुर ने वर्ष 2021 में क्रमांक/निर्माण/2021/4068 के तहत संबंधित निर्माणकर्ता को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया था कि निर्माण बिना भवन निर्माण अनुज्ञा के किया जा रहा है और यह नियमों के विपरीत है। नोटिस में तीन दिन के भीतर निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे तथा ऐसा नहीं करने पर मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 187(क) के तहत वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि, चार वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जिस निर्माण को हटाने की बात कही गई थी, वह आज भी अपनी जगह मौजूद है। इतना ही नहीं, अब वहां पूरी तरह तैयार व्यावसायिक दुकान संचालित होने की स्थिति में दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि निर्माण शुरू से ही अवैध था, तो उसे पूरा होने तक किसने संरक्षण दिया।

जानकारी के अनुसार यह निर्माण ऐसे क्षेत्र में किया गया है, जिसे आवासीय उपयोग के लिए चिन्हित किया गया है। आरोप है कि न तो नगर पालिका से आवश्यक भवन निर्माण अनुमति ली गई और न ही नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से नक्शा स्वीकृत कराया गया। इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार चलता रहा और किसी स्तर पर उसे प्रभावी ढंग से नहीं रोका गया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह निर्माण शहर की लगभग 12 फीट चौड़ी व्यस्त सड़क से सटाकर किया गया है। सड़क और नाली के लिए आवश्यक स्थान छोड़े बिना बनाई गई दुकान के सामने पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप वाहन सड़क पर ही खड़े होते हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है और दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।

स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि शहर में इस तरह के कई अन्य निर्माण भी मौजूद हैं, जहां आवासीय अनुमति लेकर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। आरोप यह भी हैं कि समय-समय पर शिकायतें और नोटिस जारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वालों का मनोबल बढ़ता है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि वर्ष 2021 में नोटिस जारी होने और कलेक्टर स्तर तक मामला पहुंचने के बावजूद वर्ष 2026 तक न तो निर्माण हटाया गया, न अनुमति संबंधी कोई ठोस कार्रवाई सामने आई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नोटिस केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

इस पूरे मामले में जब वर्तमान मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) भूपेंद्र कुमार दीक्षित से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, "मैं कुछ समय के लिए यहां से बाहर चला गया था, अभी वापस आया हूं। मुझे इस मामले की जानकारी नहीं थी। आपने जानकारी दी है, हम पूरे मामले का परीक्षण कर नियमानुसार नोटिस जारी करेंगे और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"

सीएमओ के इस बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चार वर्षों से लंबित इस मामले में वास्तव में कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाएगा। शहरवासियों की मांग है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया गया है तो संबंधित प्रावधानों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।