पिता ने 10 साल के इकलौते बेटे की दी बलि : देवी की वेदी पर सिर पटककर मार डाला, फिर शव के पास ही सोया
एक पिता ने अपने 10 साल के मासूम बेटे का सिर घर में बनी देवी की वेदी पर पटका और फिर डंडे से वार कर हत्या कर दी। फिर उसके शव के पास ही चारपाई पर सो गया।
Human Sacrifice Case : अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता पर अपने ही 10 साल के बेटे की हत्या करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने घर में देवी की वेदी के सामने बच्चे को पटककर उसकी जान ले ली। हैरानी की बात यह है कि वारदात के बाद आरोपी बेटे के शव के पास ही चारपाई पर सो गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
विंछिया गांव में हुई दर्दनाक वारदात
घटना साणंद तालुका के विंछिया गांव की है। आरोपी की पहचान नरेश पटेल के रूप में हुई है। वह खेतिहर मजदूर है। पुलिस के मुताबिक, करीब 10 दिन पहले पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद पत्नी भारतीबेन अपने मायके चली गई थी। बेटे करण की स्कूल की पढ़ाई के कारण वह उसे पिता के पास छोड़ गई थी। रविवार रात एक पड़ोसी ने फोन कर महिला को घटना की जानकारी दी।
देवी की वेदी के सामने हत्या करने का आरोप
महिला जब रात करीब साढ़े नौ बजे घर पहुंची तो बेटे का शव खून से लथपथ हालत में चारपाई पर मिला। उसके माथे पर चोट के निशान थे। शिकायत के मुताबिक, आरोपी के कपड़ों पर भी खून लगा था। महिला ने बताया कि पति ने बेटे की हत्या को बलि बताया। उसका कहना था कि परिवार में आगे कोई भी व्यक्ति भुवा की भूमिका न निभाए, इसलिए उसने ऐसा किया।
बच्चे को पटकने के बाद डंडे से किया हमला
पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नरेश ने बच्चे को पैरों से पकड़कर देवी की वेदी के सामने दो से तीन बार जमीन पर पटका। इसके बाद डंडे से उसके सिर पर वार किया। इस हमले में बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी घटना
गुजरात में इससे पहले भी नरबलि के संदेह से जुड़ी एक घटना सामने आई थी। छोटा उदयपुर जिले में एक व्यक्ति पर पांच साल की बच्ची की कुल्हाड़ी से हत्या करने का आरोप लगा था। इस घटना के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर बच्ची का खून चढ़ाने की बात भी सामने आई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने अंधविश्वास और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

