MP के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 16 मार्च तक स्थगित, स्वास्थ्य मंत्री से मिले आश्वासन के बाद लिया फैसला

लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 16 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

MP के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 16 मार्च तक स्थगित, स्वास्थ्य मंत्री से मिले आश्वासन के बाद लिया फैसला

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों ने लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर जारी अपनी हड़ताल 16 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। 9 मार्च सोमवार को सुबह 9 बजे से हड़ताल शुरु हुई, जो शाम 5 बजे तक चलती रही। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के साथ संयुक्त बैठक के बाद जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने ये निर्णय लिया है। JDA ने अपने आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि करने के साथ बताया कि बैठक में जूनियर डॉक्टरों की सभी लंबित मांगों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा की गई है।

इससे पहले मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार से जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के नेतृत्व में प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस आंदोलन में शामिल रहे। डॉक्टरों का कहना है कि शासन द्वारा पहले ही स्टाइपेंड बढ़ाने का आदेश जारी किया जा चुका है, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया है और न ही एरियर का भुगतान किया गया है।

हड़ताल का असर भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी देखने को मिल रहा है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रखी जा रही हैं और पूरी तरह से ओपीडी बंद नहीं की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि हड़ताल के साथ-साथ पैरलल ओपीडी भी चल रही है ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

जानें जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगें- 

  • 13 मार्च 2024 को जारी स्टाइपेंड बढ़ाने के आदेश को जल्द लागू किया जाए।
  • बढ़ा हुआ स्टाइपेंड 1 अप्रैल 2023 से एरियर के साथ दिया जाए।
  • हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर स्टाइपेंड बढ़ाया जाए।
  • 2022 के बाद से लंबित स्टाइपेंड बढ़ोतरी तुरंत लागू की जाए।
  • प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक समान स्टाइपेंड दिया जाए।

ओपीडी सेवाएं प्रभावित, मरीजों को करना पड़ रहा इंतजार

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पतालों में सामान्य ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कई विभागों में मरीजों की भीड़ देखने को मिली और इलाज के लिए आए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। गांधी मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर, फर्टिलिटी क्लिनिक और एएनसी रूम जैसी व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा है। इन विभागों में सामान्य दिनों में जूनियर डॉक्टर ही अधिकांश जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में उनके हड़ताल पर रहने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इलाज कराने पहुंचे कई मरीज सुबह से अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें डॉक्टरों से मिलने में काफी समय लग रहा है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज देने की व्यवस्था की जा रही है।

केवल गंभीर मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे

हड़ताल के चलते ऑपरेशन थिएटर की सेवाओं पर भी असर पड़ा। जूनियर डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि फिलहाल केवल अति गंभीर मरीजों के ऑपरेशन ही किए जाएंगे। इसके कारण प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। इन सर्जरी को इलेक्टिव ऑपरेशन माना जाता है, जिन्हें कुछ समय के लिए स्थगित किया जा सकता है।

हालांकि इससे इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को असुविधा जरूर हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आंदोलन के दौरान भी वे मरीजों की जान से जुड़े मामलों में पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसलिए इमरजेंसी सेवाएं और गंभीर मरीजों का इलाज पूरी तरह जारी रखा गया है।

करीब 8 हजार डॉक्टर आंदोलन में शामिल

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के मुताबिक इस हड़ताल में प्रदेशभर के लगभग 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न शामिल रहे। मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के इलाज और वार्ड की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा इन्हीं डॉक्टरों पर होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में इलाज और मरीजों की निगरानी का करीब 70 प्रतिशत काम रेजिडेंट डॉक्टर ही संभालते हैं। ऐसे में उनके आंदोलन पर जाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, लेकिन जब उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

स्टाइपेंड संशोधन लागू न होने से नाराजगी

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन के आदेश के अनुसार सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से मिलने वाला एरियर दिया गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर और ज्ञापन देकर अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। जेडीए से जुड़े डॉक्टरों ने सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को भी पत्र सौंपकर हड़ताल की सूचना दी है।

दो साल पहले जारी हुआ था स्टाइपेंड बढ़ाने का आदेश

प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर दो साल पहले आदेश जारी किया गया था। 13 मार्च 2024 को जारी आदेश के अनुसार जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में लगभग तीन हजार रुपए और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में करीब चार हजार रुपए तक बढ़ोतरी की गई थी।

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस आदेश का लाभ 1 अप्रैल 2023 से देने की बात कही गई थी। इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सांकेतिक हड़ताल की थी। बताया जाता है कि जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में आखिरी बार नवंबर 2022 में बढ़ोतरी की गई थी। जून 2021 में सरकार ने यह प्रावधान किया था कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी महंगाई के आधार पर हर साल की जाएगी।