मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, सरकार पर दबाव बढ़ा

मध्यप्रदेश के तृतीय वर्ग कर्मचारियों ने प्रदेशभर में प्रदर्शन कर केंद्र जैसी सुविधाओं, पुरानी पेंशन और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा जैसी मांगें रखीं। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, सरकार पर दबाव बढ़ा
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मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के बैनर तले आज प्रदेशभर में कर्मचारियों ने व्यापक प्रदर्शन शुरू कर दिया। राजधानी भोपाल से लेकर सभी जिला मुख्यालयों तक कर्मचारी सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। राजधानी भोपाल में बड़ी संख्या में कर्मचारी सतपुड़ा भवन के सामने एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सतपुड़ा भवन से मंत्रालय तक रैली निकालकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करेंगे।

कर्मचारी संघ का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से आग्रह कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और पुरानी पेंशन योजना शामिल हैं। कर्मचारी यह भी आरोप लगाते हैं कि नई नियुक्तियों में वेतन कटौती जैसे फैसले और ई-अटेंडेंस जैसी व्यवस्थाएं उनके ऊपर अनावश्यक दबाव डाल रही हैं।

कर्मचारियों की 11 प्रमुख मांगों में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने, सभी कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ प्रदान करने, नवनियुक्त कर्मचारियों को 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने के आदेश पर रोक लगाने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, शिक्षा एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के शिक्षकों को चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान देने, लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के लिपिकों के समान ग्रेड पे देने, दैनिक वेतन, स्थाई, आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, अनुकंपा नियुक्ति और चतुर्थ श्रेणी पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पीपीओ सहित सभी भुगतान समय पर करने, ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने और गुरुजी संवर्ग को सभी वैधानिक लाभ देने की मांग शामिल है।

कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदेशभर में कर्मचारियों की एकजुटता से सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।