एकल शिक्षकीय विद्यालय से शिक्षक का तबादला, स्कूल में ताले की नौबत; ट्रांसफर नीति पर उठे सवाल

शासकीय माध्यमिक विद्यालय मोरा से प्राथमिक शिक्षक का प्रशासनिक स्थानांतरण के आदेश के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

एकल शिक्षकीय विद्यालय से शिक्षक का तबादला, स्कूल में ताले की नौबत; ट्रांसफर नीति पर उठे सवाल

सतना। जिले के नागौद विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय मोरा से प्राथमिक शिक्षक वंश बहादुर यादव के प्रशासनिक स्थानांतरण के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। उनका तबादला मझगवां विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय ऊंचामार किए जाने का आदेश जारी हुआ है। स्थानीय स्तर पर इसे स्थानांतरण नीति के उल्लंघन का मामला बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, शासकीय माध्यमिक विद्यालय मोरा कक्षा 1 से 8 तक संचालित एकल शिक्षकीय विद्यालय है। ऐसे में यहां पदस्थ एकमात्र शिक्षक के स्थानांतरण से विद्यालय पूरी तरह शिक्षक विहीन हो सकता है। इससे स्कूल में ताले लगने जैसी स्थिति बनने और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रांसफर पोर्टल 3.0 के माध्यम से किया था स्थानांतरण के लिए आवेदन 

बताया जा रहा है कि शिक्षक वंश बहादुर यादव ने ट्रांसफर पोर्टल 3.0 के माध्यम से स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। वहीं, पोर्टल पर विद्यालय में दूसरे शिक्षक का नाम भी प्रदर्शित होने की जानकारी सामने आई है, जबकि स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि विद्यालय में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं। इस विसंगति ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारों के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग की 6 जून 2026 की स्थानांतरण नीति की कंडिका 3.2.3 में स्पष्ट प्रावधान है कि एकल शिक्षकीय विद्यालय में पदस्थ शिक्षक का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी गिरीश अग्निहोत्री द्वारा कलेक्टर एवं प्रभारी मंत्री से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद 30 जून को आदेश जारी किए जाने की चर्चा है।

विद्यालय शिक्षक विहीन, कार्रवाई स्थानांतरण नीति के विपरीत

शिवराजपुर संकुल के प्राचार्य विजय लाल कोल ने भी बताया कि मोरा एकल शिक्षकीय विद्यालय है। उनके अनुसार, वंश बहादुर यादव के स्थानांतरण से विद्यालय शिक्षक विहीन हो जाएगा, जिससे यह कार्रवाई स्थानांतरण नीति के विपरीत प्रतीत होती है।

हालांकि, इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विद्यालय वास्तव में एकल शिक्षकीय था, तो स्थानांतरण प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया और संबंधित तथ्यों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ, यह जांच का विषय है।

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने और विद्यालय में तत्काल शिक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।