MP विधानसभा में तीसरा अनुपूरक बजट और आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश, 23 फरवरी को होगी चर्चा

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने चालू वित्तीय वर्ष का 19 हजार 287 करोड़ 32 लाख रुपए का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया, साथ ही सदन में आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश किया गया।

MP विधानसभा में तीसरा अनुपूरक बजट और आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश, 23 फरवरी को होगी चर्चा
MP Supplementary Budget 2025-26

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में करीब 19 हजार 287 करोड़ 32 लाख रुपये का अनुपूरक बजट रखा। इस बजट पर 23 फरवरी को चर्चा होगी। इसके साथ ही राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रदेश की आर्थिक स्थिति और विकास की दिशा का पूरा ब्यौरा दिया गया है।

अनुपूरक बजट आमतौर पर तब लाया जाता है जब सरकार को पहले से तय बजट के अलावा अतिरिक्त खर्च की जरूरत होती है। इस बार का बजट भी अलग-अलग योजनाओं और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया है।

आर्थिक सर्वे 2025-26: क्या कहता है रिपोर्ट कार्ड?

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है। सरकार का दावा है कि राज्य ने संतुलित और योजनाबद्ध विकास का मॉडल पेश किया है। सर्वे में बताया गया है कि कृषि, उद्योग और सेवा—तीनों क्षेत्रों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि राज्य की विकास नीति समावेशी है, यानी हर वर्ग और हर क्षेत्र को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है।

GSDP में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि

आर्थिक सर्वे के अनुसार, वर्ष 2025-26 में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित कीमतों पर 16 लाख 69 हजार 750 करोड़ रुपये आंका गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 11.14 प्रतिशत ज्यादा है। अगर स्थिर (2011-12) कीमतों पर देखें तो GSDP 7 लाख 81 हजार 911 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि दिखाता है। इसका मतलब यह है कि सिर्फ कीमतें नहीं बढ़ीं, बल्कि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

प्रति व्यक्ति आय में हुई बढ़ोतरी

आर्थिक सर्वे की सबसे अहम बात प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी है। वर्ष 2011-12 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 38,497 रुपये थी। अब 2025-26 में यह बढ़कर 1,69,050 रुपये हो गई है। स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 76,971 रुपये तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि यह लोगों की आय और जीवन स्तर में सुधार का संकेत है।

कृषि और ग्रामीण विकास को मजबूती

प्राथमिक क्षेत्र यानी कृषि और उससे जुड़े सेक्टर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) 6 लाख 79 हजार 817 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 7.31 प्रतिशत अधिक है। कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत और खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंच गया है। ग्रामीण विकास के तहत 72,975 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया और 40.82 लाख ग्रामीण आवास बनाए गए। इससे गांवों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत हुई हैं।

उद्योग क्षेत्र में निवेश और रोजगार के मौके

द्वितीयक क्षेत्र यानी उद्योग में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली है। इस क्षेत्र का कुल GSVA 3 लाख 12 हजार 350 करोड़ रुपये रहा, जो 9.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। राज्य में 1,028 औद्योगिक इकाइयों को 6,125 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इससे 1.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता खुला है और करीब 1.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। राज्य में 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं। MSME क्षेत्र को भी हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।

सेवा क्षेत्र ने पकड़ी रफ्तार, वित्तीय स्थिति और राजस्व

तृतीयक यानी सेवा क्षेत्र ने सबसे तेज रफ्तार से वृद्धि दर्ज की है। इस क्षेत्र का कुल GSVA 5 लाख 85 हजार 588 करोड़ रुपये रहा, जो 15.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। व्यापार, होटल, रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार हुआ है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, राज्य में 618 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य अनुमानित है। राजस्व में 13.57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहा है, जिसे सरकार वित्तीय अनुशासन का संकेत बता रही है।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस

स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल 34,112 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो GSDP का लगभग 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। मातृ मृत्यु दर में भी पहले के मुकाबले काफी कमी आई है। शिक्षा के लिए कुल बजट का 10.37 प्रतिशत हिस्सा रखा गया है। कक्षा 1 से 5 तक ड्रॉपआउट दर शून्य बताई गई है, जबकि कक्षा 6 से 8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या भी बढ़ी है।

आर्थिक सर्वे 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कई क्षेत्रों में सुधार हुआ है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी और राजस्व आधिक्य जैसे संकेत राज्य की आर्थिक मजबूती की ओर इशारा करते हैं। अब नजर 23 फरवरी पर रहेगी, जब विधानसभा में अनुपूरक बजट पर विस्तार से चर्चा होगी और विपक्ष सरकार से इन आंकड़ों पर सवाल भी पूछेगा।