धार भोजशाला मामला: वकीलों की हड़ताल के चलते आज की सुनवाई टली, अब 18 फरवरी को खुलेगी ASI की रिपोर्ट
शिवपुरी में अधिवक्ता की हत्या के विरोध में वकीलों की हड़ताल के चलते धार जिले के चर्चित भोजशाला मामले में आज होने वाली सुनवाई टल गई है।
धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े बहुचर्चित मामले में सोमवार को होने वाली अहम सुनवाई टल गई। अब इस प्रकरण पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। यह सुनवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में होनी थी, जहां न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है। अधिवक्ताओं की प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण अदालत में नियमित कार्यवाही नहीं हो सकी, जिसके चलते तारीख आगे बढ़ा दी गई।

अधिवक्ताओं की हड़ताल बनी वजह
जानकारी के अनुसार, शिवपुरी में एक अधिवक्ता की हत्या के विरोध में प्रदेशभर के वकील हड़ताल पर रहे। इसी कारण इंदौर हाई कोर्ट में भी कामकाज प्रभावित हुआ और धार भोजशाला मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अपनी 98 दिनों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट, डिजिटल फोटोग्राफी और संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने थे, लेकिन हड़ताल के चलते यह प्रक्रिया टल गई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया
यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी के आदेश के बाद हो रही है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, एएसआई ने भोजशाला परिसर का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। अब इसी सर्वे रिपोर्ट को अदालत में खोला जाना है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप और धार्मिक उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय हो सकती है। इसलिए 18 फरवरी की सुनवाई को इस पूरे विवाद में निर्णायक माना जा रहा है।

मुस्लिम पक्ष ने उठाए सवाल
सुनवाई टलने के बावजूद कोर्ट परिसर के बाहर माहौल गर्माया रहा। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के सर्वे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि सर्वे के दौरान परिसर के पीछे के रास्ते से पत्थर और मूर्तियां लाकर रखी गईं और उन्हें रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उनकी आपत्तियों को जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे इस संबंध में एक और याचिका दायर कर सकते हैं।

हिंदू पक्ष अपनी मांग पर अडिग
दूसरी ओर हिंदू पक्ष का कहना है कि एएसआई के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं, जो यह साबित करते हैं कि भोजशाला वाग्देवी का प्राचीन मंदिर है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल सहित हिंदू पक्ष के प्रतिनिधियों की मांग है कि भोजशाला परिसर में नमाज पूरी तरह बंद की जाए और वहां 24 घंटे हिंदू रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए। उनका मानना है कि एएसआई की रिपोर्ट उनके दावे को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

18 फरवरी पर टिकी निगाहें
अब सभी पक्षों की नजरें 18 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन एएसआई की 98 दिनों की सर्वे रिपोर्ट को अदालत में खोले जाने की संभावना है और दोनों पक्षों को उसकी प्रति उपलब्ध कराई जा सकती है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट की सामग्री के आधार पर आगे की कानूनी रणनीति और न्यायालय की दिशा स्पष्ट होगी। प्रदेशभर में इस मामले को लेकर उत्सुकता और संवेदनशीलता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि अदालत का आगामी निर्णय भोजशाला के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
Varsha Shrivastava 
