मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर उठी अलग विंध्य प्रदेश की मांग, भोपाल में जुटे सैकड़ों लोग
Bhopal News: मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर भोपाल में अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर सैकड़ों लोग जुटे. जानिए 1948 में विंध्य प्रदेश का गठन कैसे हुआ और 1956 में मध्य प्रदेश में इसका विलय क्यों हुआ.
Madhya Pradesh Foundation Day 2026: मध्य प्रदेश आज 71वें स्थापना दिवस में प्रवेश कर गया है. 1 नवंबर 1956 ही वो तारीख है, जिस दिन मध्य प्रदेश का गठन हुआ था. लेकिन यही वो तारीख भी है, जब विंध्य प्रदेश का मध्य प्रदेश में विलय कर दिया गया था. एक तरफ भोपाल में मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस का जश्न मन रहा है, तो दूसरी तरफ इसी भोपाल में अलग विंध्य प्रदेश बनाने की मांग भी उठ रही है.
भोपाल के तुलसी नगर में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जयंती मैदान में विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए हैं. प्रदर्शन में शामिल लोग विंध्य क्षेत्र को मध्य प्रदेश से अलग कर नया राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि विंध्य की अपनी अलग पहचान रही है. आजादी के बाद विंध्य प्रदेश का अलग अस्तित्व था, लेकिन 1956 में उसका मध्य प्रदेश में विलय कर दिया गया. अब एक बार फिर विंध्य को अलग राज्य बनाने की जरूरत है.
आजादी के बाद अलग राज्य था विंध्य प्रदेश
विंध्य प्रदेश की मांग करने वाले लोग जिस इतिहास की बात कर रहे हैं, उसकी शुरुआत देश की आजादी के ठीक बाद से होती है. दरअसल, आजादी मिलने के बाद देश में सैकड़ों रियासतों का विलय किया जा रहा था. इसी दौरान 1948 में बघेलखंड और बुंदेलखंड की 35 रियासतों को मिलाकर विंध्य प्रदेश बनाया गया.
इसकी राजधानी रीवा रखी गई थी. विंध्य प्रदेश की अपनी विधानसभा और सरकार थी. पंडित शंभूनाथ शुक्ल यहां के पहले मुख्यमंत्री बने थे. यानी जिस विंध्य प्रदेश को आज अलग राज्य बनाने की मांग की जा रही है, उसका कभी सब कुछ अपना था. अपनी प्रशासनिक इकाई थी.
1 नवंबर 1956 को खत्म हो गया अस्तित्व
अब सवाल है कि जब विंध्य प्रदेश अलग था, तो फिर वो मध्य प्रदेश का हिस्सा कैसे बन गया? दरअसल, आजादी के बाद देश में राज्यों की सीमाओं को नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसके लिए राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया. आयोग की सिफारिशों के बाद 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ. इसके तहत 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश का गठन किया गया. उस समय विंध्य प्रदेश के साथ मध्य भारत, भोपाल और तत्कालीन मध्य प्रदेश को मिलाकर नया मध्य प्रदेश बनाया गया था. इस फैसले के साथ ही विंध्य प्रदेश का अलग राज्य के रूप में अस्तित्व खत्म हो गया.
इसके बाद साल 2000 में मध्य प्रदेश का एक और बंटवारा हुआ और छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गया. लेकिन विंध्य को अलग राज्य बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही.
स्थापना दिवस पर फिर चर्चा में आया विंध्य प्रदेश
अब मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर एक बार फिर अलग विंध्य प्रदेश की मांग उठी है. भोपाल में जुटे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विंध्य की अपनी ऐतिहासिक पहचान रही है और उसे फिर से अलग राज्य का दर्जा मिलना चाहिए.
यानी जिस 1 नवंबर को मध्य प्रदेश अपने गठन का जश्न मना रहा है, उसी तारीख का विंध्य के इतिहास में एक दूसरा मतलब भी है. क्योंकि इसी दिन विंध्य प्रदेश की अलग पहचान खत्म हुई थी और वह मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया था.

