भोपाल: वित्त विभाग सख्त, 10 दिन में फाइल निपटाना अनिवार्य, नई गाइडलाइन जारी

मध्यप्रदेश वित्त विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें 10 दिन में फाइल निपटाने की समयसीमा तय की गई है. 1 अप्रैल 2026 से निर्माण कार्यों के पर्यवेक्षण शुल्क में भी बदलाव लागू होगा.

भोपाल: वित्त विभाग सख्त, 10 दिन में फाइल निपटाना अनिवार्य, नई गाइडलाइन जारी

भोपाल में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की जो घोषणाएं समय-समय पर होती हैं. या मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव मानिट के जो मामले होते हैं, उन सभी से जुड़ी फाइलें वित्त विभाग में कोई भी अधिकारी एक समयसीमा से अधिक रोककर नहीं रख सकेगा.  अधिकतम दस दिनों में फाइलों का निपटारा करके आगे बढ़ानी होंगी. इसके लिए वित्त विभाग ने अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शिका तैयार की है.

इसमें सबके जिम्मेदारियों को साफ किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई असमंजस की स्थिति ना रहे. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री सहित विशेष व्यक्तियों से प्राप्त होने वाले पत्रों को तुरंत कार्रवाई करना होगा. इसका रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा. कैबिनेट की बैठक में रखे जाने वाले विषयों की संक्षेपिका तैयार करना, विभागीय अभिमत समय पर देना, विभिन्न आयोगों से प्राप्त होने वाले प्रतिवेदन व अनुशंसाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने, समितियों की बैठक समय पर संपन्न करवाना, अवकाश, पेंशन, सामान्य भविष्य निधि से जुड़े मामलों का समयावधि में प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करवाना अपर सचिव और उपसचिव का दायित्व होगा.

मनमाना पर्यवेक्षण शुल्क नहीं ले सकेंगे

वहीं, वित्त विभाग में निर्माण कार्यों पर लिए जाने वाले पर्यवेक्षण शुल्क को लेकर भी नई व्यवस्था बना दी है, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले निर्माण कार्य की एजेंसी विभाग है तो तकनीकी स्वीकृति पर पर्यवेक्षण शुल्क शून्य रहेगा। जबकि, निर्माण एजेंसी शासन की कोई संस्था है तो यह एक प्रतिशत रहेगा। 10 करोड रुपये से अधिक के निर्माण कार्य में एजेंसी शासन होने पर पर्यवेक्षण शुल्क तीन प्रतिशत और अन्य संस्था होने पर छह प्रतिशत की दर से लिया जाएगा।