इंदौर दूषित पानी से मौतों पर सियासत: उमंग सिंघार ने सरकार-नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप, मंत्री और महापौर से मांगा इस्तीफा
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की बीजेपी सरकार, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर लापरवाही, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए साथ ही मंत्री और महापौर से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सियासत गर्मा गई है। 6 जनवरी मंगलवार को इंदौर में प्रेस वार्ता करते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की बीजेपी सरकार, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर सीधे-सीधे लापरवाही, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफे की मांग की, साथ ही शहर के रहवासी संघों से अपने क्षेत्र का वॉटर सोशल सर्वे करवाने की अपील भी की।
पहले चूहा कांड और अब दूषित पानी से मौतें- सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नए साल पर इंदौर आया था, सोचा था खुशियां मिलेंगी, पर यहां तो कई घरों के दीपक बुझ चुके हैं। सिंघार ने बीजेपी सरकार पर हमला तेज करते हुए कहा कि इंदौर में पहले चूहा कांड हुआ और अब दूषित पानी से मौतें. . .फिर भी सरकार सोई रही। स्वास्थ्य और पर्यावरण के मोर्चे पर प्रशासन पूरी तरह नाकाम है। उन्होंने तंज कसा कि इंदौर को 8 बार स्वच्छता का अवॉर्ड मिला, लेकिन अवॉर्ड कैसे लिए जा रहे हैं, अब जनता सब समझ रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर नगर निगम से सीधे सवाल पूछे
नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर नगर निगम पर भी सीधे सवाल दागे। उमंग सिंघार ने कहा कि शहर में सड़कें खोदो फिर बनाओ, ब्लॉक उखाड़ों फिर लगाओ जैसी कार्यशैली नई परंपरा बन चुकी है। ड्रेनेज घोटाले से लेकर फर्जी बिल तक हर जगह भ्रष्टाचार हावी है। सिंघार ने आरोप लगाया कि कुछ बीजेपी पार्षदों के आलीशान बंगले और स्विमिंग पूल इसी भ्रष्टाचार की कमाई से बन रहे हैं। उन्होंने नाम लेते हुए पार्षद और एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा को कटघरे में खड़ा किया।
भागीरथपुरा ड्रेनेज टेंडर पर नेता प्रतिपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष ने सबसे बड़ा हमला भागीरथपुरा ड्रेनेज टेंडर पर किया और खुलासा किया कि 30 जनवरी 2023 को परिषद ने लाइन डालने का निर्णय लिया, लेकिन टेंडर को दो साल क्यों लगे? और जब टेंडर हुआ तो पांच महीने बाद भी काम शुरू क्यों नहीं हुआ? उन्होंने दस्तावेज लहराते हुए कहा कि यह देरी किसी साधारण लापरवाही का नाम नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रशासनिक मिलीभगत का सबूत है।
स्वच्छता पर 8000 करोड़ खर्च फिर भी शहरों की हालत बेहाल
उमंग सिंघार ने कहा कि स्वच्छता पर 8,000 करोड़ खर्च होने के बावजूद शहरों की हालत उजाड़ है—यह विचारों और व्यवस्था की पूरी तरह शून्यता है। उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की हाई-लेवल जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। वहीं 11 जनवरी को राहुल गांधी के इंदौर आने के सवाल पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस बारे में जानकारी मिलते ही दौरा कार्यक्रम बता दिया जाएगा। साथ ही कहा कि कांग्रेस पार्टी भी अपनी और से पीड़ितो को मुआवजा देने के पहलू पर विचार कर रही है।
Varsha Shrivastava 
