इंदौर के भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त से एक और मौत का दावा, मृतकों की संख्या 29, शव रखकर प्रदर्शन
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी दस्त से 29वीं मौत होने की खबर है। बताया जा रहा है कि मृतक ने दो बार स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराया था। वहीं परिजनों ने भागीरथपुरा चौक पर शव रखकर प्रदर्शन किया। इधर, हाईकोर्ट ने दूषित पानी मामले में सुनवाई करते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त की चपेट में आकर एक और मरीज की मौत का दावा किया जा रहा है। इलाके में हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं और अब मृतकों की संख्या 29 बताई जा रही है। जिसके बाद आज मृतक के परिजनों ने शासन प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते हुए शव रखककर प्रदर्शन किया।
परिजनों ने शासन - प्रशासन पर लागए आरोप
दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछली रात 62 वर्षीय खूबचंद बंधोनियां की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मृतक ने बीमारी के दौरान दो बार स्वास्थ्य केंद्र में इलाज भी कराया था, इसके बावजूद उनकी हालत पर कोई ठोस निगरानी नहीं रखी गई। मौत से आक्रोशित परिजन शव को लेकर भागीरथपुरा चौकी पहुंचे और चौकी के सामने शव रखकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने शासन-प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बीमारी के दौरान समय पर न इलाज मिला और न ही प्रशासन ने सुध ली। वही प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने क्षेत्रीय भाजपा पार्षद कमल वाघेला के खिलाफ भी नारेबाजी की। फिलहाल मौके पर पुलिस मौजूद है और हालात को संभालने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सिंटू चौकसे भी मौके पर पहुंचे जहां उन्होंने मृतक के परिजनों के साथ चर्चा कर उन्हें सांत्वना दी।
मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
इधर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार यानी 27 जनवरी को सुनवाई हुई। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौत के मामले पर करीब ढाई घंटे से ज्यादा सुनवाई चली। कोर्ट में 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई। जिसमें से 16 मौतें दूषित पानी से मानी है। जबकि चार को लेकर असमंजस की स्थिति बताई है। वहीं तीन की मौत दूषित पानी से नहीं मानी है।
वहीं हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है। स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। इसके अलावा हाईकोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश दिये और चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी।
DRASHTI JAIN 
