रतलाम में गणतंत्र दिवस पर मंत्री विजय शाह को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर कांग्रेस का विरोध
मध्य प्रदेश सरकार में जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह को रतलाम में गणतंत्र दिवस ध्वजारोहण समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर कांग्रेस ने इसे सेना,संविधान और राष्ट्रीय गरिमा का अपमान बताते हुए तीखा विरोध किया है।
भोपाल:मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस के लिए जारी की गई ध्वजारोहण कार्यक्रम सूची सामने आते ही सियासी बवाल खड़ा हो गया है। रतलाम जिले में होने वाले ध्वजारोहण मुख्य समारोह के लिए कैबिनेट मंत्री विजय शाह को मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज़ जताया है। कांग्रेस का कहना है कि जिस मंत्री पर देश की बेटी और भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी का अपमान करने का गंभीर आरोप हो, उन्हें गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामय राष्ट्रीय पर्व पर मंच देना बेहद शर्मनाक है। पार्टी ने इसे सीधे-सीधे राष्ट्रीय सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा मामला बताया है।
विवेक त्रिपाठी बोले-यह सेना और संविधान का अपमान
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि, मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की थी। इतना ही नहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक ने सख्त रुख अपनाया और मंत्री को फटकार लगाई। इसके बावजूद उन्हें रतलाम में तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी सौंपना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि सेना और संविधान दोनों का अपमान है। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे व्यक्ति का गणतंत्र दिवस पर मंच से संबोधन देश को गलत संदेश देता है और राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
पूरा मामला क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग में अहम भूमिका निभाने वाली भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद पूरे देश में भारी विरोध देखने को मिला। दबाव बढ़ने पर मंत्री ने माफी तो मांगी, लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। बयान की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और मंत्री के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए।
SIT रिपोर्ट के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंप दी है। इसके बावजूद अब तक मंत्री के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जा सकती है।ऐसे में सवाल यह है कि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो क्या ऐसे मंत्री को गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर मुख्य अतिथि बनाना उचित है?
sanjay patidar 
