MP: 6 साल में 2.70 लाख से अधिक महिलाएं-बालिकाएं लापता, 50 हजार का अब तक सुराग नहीं

मध्य प्रदेश में 6 साल में 2.70 लाख से ज्यादा महिलाएं-बालिकाएं लापता, 50 हजार से अधिक का अब तक सुराग नहीं मिला

MP: 6 साल में 2.70 लाख से अधिक महिलाएं-बालिकाएं लापता, 50 हजार का अब तक सुराग नहीं
Madhya Pradesh Missing Women And Girls

मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इस मुद्दे ने विधानसभा से सड़क तक राजनीति गरमा दी है। कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के सवाल पर गृह विभाग ने 28 जनवरी 2026 तक के आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से अब तक कुल 2,70,300 महिलाएं और बालिकाएं लापता दर्ज हुई हैं।

कुल आंकड़े और बरामदगी

आंकड़ों के अनुसार 2,06,507 महिलाएं लापता हुईं, जिनमें से 1,58,523 को अब तक बरामद किया जा चुका है। बालिकाओं के मामले में 63,793 लापता हुईं, जिनमें से 61,607 को सुरक्षित पाया गया। अभी भी कुल 50,170 महिलाएं और बालिकाएं लापता हैं जिनका कोई सुराग नहीं मिल सका है।

साल-दर-साल बढ़ती घटनाएं

पिछले छह साल में लापता मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। 2024 में 50,798 मामले सामने आए जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 54,897 हो गई। वर्ष 2026 में सिर्फ 28 जनवरी तक ही 4,197 मामले दर्ज हो चुके हैं। यह आंकड़े महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

कांग्रेस विधायक का आरोप

कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने इन आंकड़ों को अत्यंत गंभीर बताया और कहा कि प्रदेश में महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशील नहीं है और समय रहते सख्त कदम न उठाए जाने पर स्थिति और बिगड़ सकती है। भूरिया ने विशेष मॉनिटरिंग तंत्र और जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

महिला एवं बाल विकास मंत्री का जवाब

महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि उन्हें इस आंकड़े की जानकारी नहीं थी। जब उन्हें बताया गया कि यह आंकड़ा स्वयं सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत किया है, तो उन्होंने मामले की समीक्षा करने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी इस तरह के मामले सामने आते हैं, सरकार कार्रवाई करती है और महिलाओं तथा बच्चियों के हित में लगातार काम कर रही है।

सरकार की कार्रवाई

गृह विभाग के अनुसार महिला थाने, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और विशेष अभियानों के जरिए लापता मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है। बावजूद इसके 50 हजार से अधिक लंबित मामलों ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।