इंदौर MY अस्पताल में अचानक निरीक्षण: डीन ने BVG पर 25 हजार का जुर्माना लगाया, सुपरिटेंडेंट और भवन अधिकारी को नोटिस
वायरल वीडियो के बाद इंदौर के एमवाय अस्पताल में सख्ती:दीवारों पर फफूंद, गंदगी; सुपरिटेंडेंट, भवन अधिकारी को नोटिस, BVG पर 25 हजार का जुर्माना
इंदौर। सरकारी एमवाय अस्पताल में हाल ही में हुई लापरवाही और अव्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए महात्मा गांधी स्मृति मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घंघोरियाअरविंद घंघोरिया ने अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की हर मंजिल का दौरा किया और गंदगी, फफूंद लगी दीवारें, टूटी खिड़कियां, खराब बाथरूम और जगह-जगह टूटे टाइलों को देखकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
डीन ने मरीजों से सीधे बातचीत की और उनके अनुभवों को सुना। कई मरीजों को गले लगाकर उनकी परेशानियों का पता लगाया और अस्पताल स्टाफ की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि किसी भी मरीज को दर्द, देरी या अव्यवस्था का सामना नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही डॉक्टरों को समय पर ड्यूटी पर आने, खराब मशीनों को तुरंत दुरुस्त करने, दवाइयों की 100% उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों से अच्छा व्यवहार रखने के आदेश दिए।
अस्पताल स्टाफ और सुपरविजन पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान डीन ने नर्सिंग स्टाफ के रोस्टर की भी जांच की। देर से आने वाले कर्मचारियों को तुरंत चेतावनी दी गई। साफ चादरों की उपलब्धता, तत्काल इलाज और किसी भी समस्या की सीधे डीन को रिपोर्ट करने के निर्देश सख्ती से लागू किए गए।
अस्पताल में मेंटेनेंस का काम न करवाने और बजट के बहाने काम में देरी करने के कारण डीन ने सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादवअशोक यादव और भवन अधिकारी जितेंद्र रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया। वहीं, सुपरविजन और मेंटेनेंस करने वाली कंपनी भारत विकास ग्रुप (BVG)भारत विकास ग्रुप (BVG) पर 25,000 रुपये का जुर्माना ठोका गया।
वीडियो वायरल और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दो महिलाएं मरीज को पहिए वाले स्ट्रेचर पर सड़क पार करते हुए दिखाई दीं। वीडियो में देखा गया कि ये महिलाएं शासकीय डेंटल कॉलेज के सामने से गुजरते हुए एमवाय अस्पताल के मुख्य गेट तक पहुंचीं, लेकिन गेट बंद होने के कारण उन्हें स्ट्रेचर को अगले गेट तक धकेलना पड़ा।
इस वीडियो ने अस्पताल की आपातकालीन सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने पूछा कि यदि स्ट्रेचर सरकारी अस्पताल का है तो वह सड़क पर कैसे पहुंचा और परिजन को मरीज को खुद स्ट्रेचर पर ले जाना क्यों पड़ा।
डीन का तत्काल दौरा और निरीक्षण
डीन ने वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल का दौरा किया और चौथी व पांचवीं मंजिल की दीवारों, बाथरूम और टूटी टाइलों में फफूंद और गंदगी पाए जाने पर सुपरिटेंडेंट और सुपरवाइजर पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल में इन समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई। एक महीने पहले भी उन्होंने अस्पताल में लापरवाही पर नाराजगी जताई थी, इसके बावजूद सुधार नहीं हुआ।
कलेक्टर, कमिश्नर और मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ था। डीन ने साफ किया कि अब इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुरक्षा और प्रबंधन की जांच
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि मरीजों के लिए 108 एम्बुलेंस की केंद्रीय सुविधा मौजूद है और किसी भी मरीज को स्ट्रेचर पर अस्पताल परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है। डीन के आदेश पर सुरक्षा गार्ड, स्ट्रेचर बॉय और अन्य कर्मचारियों से जुड़े रिकॉर्ड और फुटेज की जांच की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने दोहराया कि मरीजों को बाहर ले जाने से रोकने के सख्त निर्देश पहले से लागू हैं।
डीन की आकस्मिक और कड़ी कार्रवाई के बाद अस्पताल में तनाव व्याप्त है, लेकिन मरीजों और आम नागरिकों में सुधार की उम्मीद भी जगी है। अब यह देखना बाकी है कि अस्पताल प्रशासन और स्टाफ कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से डीन के आदेशों को लागू करते हैं।
Varsha Shrivastava 
