Health Alert : मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ जाए तो क्या होगा? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
Health Alert : गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने से शरीर में गंभीर ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन हो सकता है। जानें इसके शुरुआती लक्षण, किडनी और दिल पर पड़ने वाले असर, इलाज और बचाव के जरूरी तरीके।
Health Alert : ब्लड ट्रांसफ्यूजन यानी खून चढ़ाना कई गंभीर स्थितियों में मरीज की जान बचाता है। लेकिन अगर मरीज को ऐसा खून चढ़ जाए, जो उसके ब्लड ग्रुप के अनुकूल नहीं है, तो स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में शरीर का इम्यून सिस्टम चढ़ाई गई लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। इस गंभीर स्थिति को एक्यूट हीमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन कहा जाता है। इससे किडनी और शरीर के दूसरे अंग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, ब्लड ग्रुप की जांच और क्रॉस-मैचिंग जैसी प्रक्रियाओं के कारण ऐसी घटनाएं दुर्लभ हैं। आइए जानते हैं कि गलत खून चढ़ने पर क्या होता है, किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इससे बचाव कैसे किया जाता है।
गलत ब्लड ग्रुप का खून शरीर में जाते ही क्या होता है?
हर व्यक्ति के खून की लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर कुछ खास एंटीजन होते हैं। ABO और Rh जैसे ब्लड ग्रुप सिस्टम के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-सा खून किस मरीज के लिए अनुकूल है। अगर असंगत खून चढ़ जाए, तो मरीज का इम्यून सिस्टम दान की गई लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर सकता है।
इससे कोशिकाएं टूटने लगती हैं। इस प्रक्रिया को हीमोलाइसिस कहते हैं। इस दौरान निकलने वाला हीमोग्लोबिन और शरीर की दूसरी प्रतिक्रियाएं गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती हैं। हालांकि, हर गलत या असंगत ट्रांसफ्यूजन का असर एक जैसा नहीं होता। खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि खून कितना असंगत है और मरीज के शरीर में कैसी प्रतिक्रिया हो रही है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने पर प्रतिक्रिया ट्रांसफ्यूजन के दौरान या उसके बाद हो सकती है। इसके शुरुआती संकेतों में तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, सीने या कमर में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना शामिल हैं। कुछ मरीजों में ब्लड प्रेशर गिर सकता है, पेशाब का रंग गहरा हो सकता है या पेशाब कम आने लग सकता है।
हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। इसलिए खून चढ़ने के दौरान अचानक असहजता, दर्द या घबराहट महसूस होने पर तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताना चाहिए। ऐसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
किडनी और दिल पर कैसे पड़ सकता है असर?
जब लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटती हैं, तो शरीर में ऐसी प्रतिक्रियाएं शुरू हो सकती हैं जो किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। गंभीर मामलों में अचानक किडनी फेल होने का खतरा रहता है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर बहुत कम हो सकता है, जिससे शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होती है।
कुछ गंभीर स्थितियों में खून के थक्के बनने और असामान्य रक्तस्राव जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर में भारी गिरावट और अंगों तक पर्याप्त रक्त न पहुंचने से दिल सहित दूसरे अंग प्रभावित हो सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
गलत खून चढ़ने से बचाव और रिएक्शन होने पर क्या करें?
ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले मरीज की पहचान, ABO और Rh ब्लड ग्रुप तथा डोनर के खून की अनुकूलता की जांच की जाती है। क्रॉस-मैचिंग के जरिए भी यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि खून मरीज के लिए उपयुक्त है। ट्रांसफ्यूजन से पहले और उसके दौरान मरीज की स्थिति की निगरानी भी जरूरी है।
अगर खून चढ़ते समय किसी गंभीर रिएक्शन का शक हो, तो मेडिकल टीम को तुरंत ट्रांसफ्यूजन रोककर मरीज की जांच और जरूरी इलाज शुरू करना चाहिए। जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, किडनी की निगरानी, तरल पदार्थ और अन्य उपचार दिए जा सकते हैं। गंभीर मामलों में आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है।

