MP Pre PG Counselling 2026: हाईकोर्ट का आदेश, इन-सर्विस डॉक्टरों को 30% सीटें
MP Pre PG Counselling 2026 में जबलपुर हाईकोर्ट ने इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए प्रत्येक विशेषज्ञता में अधिकतम 30% सीटों की सीमा तय की। सरकार से 5 नवंबर तक जवाब मांगा।
MP Pre PG Counselling 2026 : मध्य प्रदेश में मेडिकल पीजी (MD/MS) में दाखिले की प्रक्रिया के बीच जबलपुर हाईकोर्ट ने इन-सर्विस डॉक्टरों के सीट आवंटन को लेकर अहम अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विशेषज्ञता में सेवारत डॉक्टरों को कुल उपलब्ध सीटों में से अधिकतम 30 प्रतिशत सीटें ही आवंटित की जा सकेंगी। इसके साथ ही ओपन कैटेगरी और इन-सर्विस अभ्यर्थियों की मेरिट सूची अलग-अलग रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मेरिट सूची को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे अभ्यर्थी
दरअसल, मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) की ओर से जारी प्री-PG काउंसलिंग की मेरिट सूची को ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों ने चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि दोनों श्रेणियों के अभ्यर्थियों की मेरिट सूची को एक साथ जोड़ने से सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के सीट आवंटन पर असर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मेडिकल पीजी में प्रवेश का आधार अभ्यर्थियों की मेरिट होनी चाहिए। अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को उनकी रैंक के अनुसार पसंदीदा विशेषज्ञता में प्रवेश का अवसर मिलना चाहिए। संयुक्त मेरिट सूची के चलते बेहतर रैंक वाले अभ्यर्थियों के विकल्प प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए 30% की सीमा निर्धारित
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने की। ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने पक्ष रखा।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया कि कुछ मेडिकल विशेषज्ञताओं में इन-सर्विस डॉक्टरों को निर्धारित सीमा से अधिक सीटें दिए जाने की स्थिति बन रही है। इससे ओपन कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध सीटों और उनके प्रवेश के अवसरों पर असर पड़ सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए प्रत्येक विशेषज्ञता में इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए अधिकतम 30 प्रतिशत सीट आवंटन की सीमा तय कर दी। अदालत ने दोनों श्रेणियों की मेरिट सूची को मिलाने पर भी रोक लगाई है।
सरकार और DME को 5 नवंबर तक देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश शासन और निदेशक चिकित्सा शिक्षा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। संबंधित पक्षों को 5 नवंबर 2026 तक अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया और सीट आवंटन की व्यवस्था पर स्पष्टीकरण देना होगा।
10 नवंबर को समाप्त होगा काउंसलिंग का पहला चरण
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में प्री-PG काउंसलिंग का पहला चरण जारी है, जिसकी प्रवेश प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 को समाप्त होनी है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह आदेश काउंसलिंग की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजर 5 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी। सरकार के जवाब और अदालत के आगामी निर्देशों से यह स्पष्ट होगा कि मेडिकल पीजी सीटों का आवंटन किस तरह आगे बढ़ेगा।

