'मोदी का बाप भी जाएगा', प्रधानमंत्री पर खरगे का विवादित बयान, शिवराज सिंह चौहान, बोले- कांग्रेस के DNA में दूसरों का अपमान करना
मल्लिकार्जुन खड़गे की पीएम मोदी के दिवंगत पिता पर टिप्पणी को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर निशाना साधा। सोनिया और राहुल गांधी से जवाब मांगा।
भोपाल। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान पर सियासी विवाद बढ़ गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने खड़गे पर पलटवार करते हुए कांग्रेस और गांधी परिवार को घेरा है। शिवराज ने कहा कि कांग्रेस के DNA में अपने परिवार के अलावा दूसरों का अपमान करना है। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वे खड़गे के बयान पर देश को जवाब देंगे या इस भाषा का समर्थन करेंगे?
दरअसल, 25 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा। शिवराज सिंह चौहान ने भी इसे राजनीतिक मर्यादा और भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा।
खड़गे ने क्या कहा था?
पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। इसी बीच सभा में मौजूद एक व्यक्ति की टिप्पणी के जवाब में खड़गे ने कहा, 'मोदी का बाप भी जाएगा।'
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। भाजपा नेताओं ने खड़गे की भाषा पर सवाल उठाए और इसे प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक बताया।
#WATCH | A ruckus broke out during Congress national president Mallikarjun Kharge's address at the 139th birth anniversary celebration of Dr. Shri Krishna Singh in Patna, Bihar A person present at the event said that PM Modi would not go anywhere, Kharge responded, "Modi ka baap bhi jayega."
— ANI (@ANI) October 25, 2026
'हार की बौखलाहट में मर्यादा और शालीनता भूल गई कांग्रेस'
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खड़गे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस हार की बौखलाहट में मर्यादा और शालीनता भूल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के DNA में अपने परिवार के अलावा दूसरों का अपमान करना है।
शिवराज ने कहा कि गांधी परिवार प्रधानमंत्री पद को अपनी बपौती समझता था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान रखना हमारी सभ्यता, संस्कृति और संस्कार हैं। किसी के दिवंगत पिता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ है।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मांगा जवाब
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी को खड़गे के बयान पर देश को जवाब देना चाहिए।
शिवराज ने सोनिया गांधी से सवाल किया कि क्या खड़गे ने गांधी परिवार के इशारे पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया? उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से पूछा कि पार्टी खड़गे से इस्तीफा लेगी या उनके बयान का समर्थन करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस को विचार करना चाहिए कि क्या मल्लिकार्जुन खड़गे राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बने रहने योग्य हैं।
'पहले माताजी के लिए अमर्यादित शब्द, अब पिताजी का अपमान'
शिवराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता के लिए पहले अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया और अब उनके दिवंगत पिता को लेकर टिप्पणी की गई है। उन्होंने इसे राजनीतिक संवाद की मर्यादा के खिलाफ बताया।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी करोड़ों देशवासियों के हृदय के हार और भारत के मुकुटमणि हैं। शिवराज ने कहा कि किसी का अपमान करके जनता का दिल नहीं जीता जा सकता। उनके मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी से कांग्रेस जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो रही है और घृणा की पात्र बन रही है।
खड़गे ने भाजपा और RSS पर भी लगाए आरोप
पटना के कार्यक्रम में खड़गे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा था। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाए तथा भाजपा पर राजनीतिक आरोप लगाए। उनके संबोधन में महंगाई, रोजगार और बिहार की कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे भी शामिल थे।
खड़गे की टिप्पणी पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। शिवराज सिंह चौहान ने जहां कांग्रेस नेतृत्व से जवाब और कार्रवाई की मांग की है, वहीं इस विवाद ने राजनीतिक भाषा और नेताओं के सार्वजनिक बयानों की मर्यादा पर बहस को फिर सामने ला दिया है।

