रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल: बोले- सरकार की ऐसी क्या मजबूरी?

विंध्य की धरती पर परमाणु संयंत्र क्यों? नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा पर मांगा जवाब, रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल: बोले- सरकार की ऐसी क्या मजबूरी?

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है?

रीवा पहुंचे मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई देशों में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं उठाई जा रही हैं, पुराने संयंत्र बंद किए जा रहे हैं और नए संयंत्रों के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, तो आखिर भारत में इस तरह के पावर प्लांट की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? सरकार रीवा क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने के लिए इतनी इच्छुक क्यों है और इसके पीछे ऐसी क्या मजबूरी है, जिसे जनता के सामने स्पष्ट नहीं किया जा रहा?

स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सवाल

उमंग सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा कि देश में पहले से ही कई बिजली उत्पादन केंद्र मौजूद हैं। ऐसे में रीवा जैसे क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की जरूरत क्या है? उन्होंने आशंका जताई कि परमाणु संयंत्र के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके संभावित प्रभावों को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि प्लांट स्थापित होता है, तो उसके आसपास 40 से 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली आबादी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर सरकार के पास क्या ठोस योजना है? क्या सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि स्थानीय लोगों को किसी तरह के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना नहीं करना पड़ेगा?

परियोजना के नियमों और शर्तों पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने परियोजना के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों के पालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरण, स्थानीय आबादी और जनहित से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शी तरीके से विचार किया जाना चाहिए। यदि किसी परियोजना से लोगों के मन में स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर आशंकाएं हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन आशंकाओं का जवाब दे और ग्रामीणों को विश्वास में ले।

सिंघार ने की सरकार से पारदर्शिता की मांग

नेता प्रतिपक्ष सिंघार का कहना है कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है, इसके संभावित लाभ क्या हैं और इससे जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।

उन्होंने परियोजना को लेकर उठ रहे विरोध और ग्रामीणों की चिंताओं के बीच सरकार से जवाब मांगा है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार स्थानीय लोगों की आशंकाओं को दूर करने के लिए सभी तकनीकी और पर्यावरणीय रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी, या फिर परियोजना को लेकर विरोध और तेज होगा?