जर्मनी के बाद कंबोडिया के राष्ट्रीय कोच ने सराहा शहडोल का फुटबॉल जुनून
शहडोल का छोटा सा गांव बिचारपुर, जिसे आज देश मिनी ब्राजील के नाम से जानता है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत पर चमक उठा है.
शहडोल का छोटा सा गांव बिचारपुर, जिसे आज देश मिनी ब्राजील के नाम से जानता है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत पर चमक उठा है. PM नरेंद्र मोदी के पॉडकास्ट में चर्चा में यह गांव. अब विदेशी कोचों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. कंबोडिया के राष्ट्रीय फुटबॉल कोच चार्ली पॉमरोय का बिचारपुर पहुंचना इस बात का संकेत है. इतना ही नहीं इससे पहले यहां जर्मनी के राष्ट्रीय कोच तक यहां आ चुके हैं.
इंग्लैंड मूल के चार्ली पॉमरोय, जो वर्तमान में कंबोडिया और नौरू की राष्ट्रीय टीम के कोच हैं, सोशल मीडिया के जरिए शहडोल के मिनी ब्राज़ील कहे जाने वाले विचारपुर के फुटबॉलरों की कहानी से प्रभावित होकर बिचारपुर पहुंचे, जिला फुटबॉल संघ और स्थानीय कोचों ने उनका स्वागत किया. फुटबॉल कोच रईस अहमद ने बताया कि कैसे कभी नशे के लिए बदनाम बिचारपुर आज अनुशासन और फुटबॉल संस्कृति की पहचान बन चुका है.
लगातार मेहनत करना जरूरी
खिलाड़ियों ने संसाधनों और प्रशिक्षण की चुनौतियां रखीं, जिस पर पॉमरोय ने सीमित साधनों में निरंतर मेहनत और सिलेबस आधारित प्रशिक्षण पर जोर दिया, मिनी ब्राज़ील बिचारपुर आज ग्रामीण भारत की खेल क्रांति की मिसाल बनता जा रहा है.
पीएम के चर्चा के बाद मिली पहचान
पीएम नरेंद्र मोदी के पॉडकास्ट में चर्चा के बाद शहडोल का बिचारपुर देशभर में पहचान बना गया. कभी नशे के लिए बदनाम यह गांव आज मिनी ब्राज़ील के नाम से फुटबॉल का गढ़ बन चुका है, जहां से निकलती प्रतिभा अब अंतरराष्ट्रीय कोचों का भी ध्यान खींच रही है. मिनी ब्राजील बिचारपुर आज न केवल शहडोल बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण प्रतिभा और खेल परिवर्तन की मिसाल बनता जा रहा है.
shivendra 
