कल्पना मिश्रा मौत मामला: 20 दिन में डॉ. गुंजन गोस्वामी की बहाली, निलंबन की कार्रवाई पर उठे सवाल

डॉ. गुंजन गोस्वामी की बहाली पर विवाद: कल्पना मिश्रा मौत के मामले पर बड़ी कार्यवाही करते हुए डॉक्टर गुंजन गोस्वामी को किया गया था निलंबित, जांच समिति के निष्कर्ष का दिया गया हवाला

कल्पना मिश्रा मौत मामला: 20 दिन में डॉ. गुंजन गोस्वामी की बहाली, निलंबन की कार्रवाई पर उठे सवाल

रीवा। संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। मामले में निलंबित की गईं डॉक्टर गुंजन गोस्वामी को करीब 20 दिन के भीतर बहाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस फैसले के बाद विभाग की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह भी है कि जब मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर को निलंबित किया गया था, तो इतनी जल्दी बहाली की जरूरत क्यों पड़ी?

43 दिन बाद किया गया था निलंबित

कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत 26 अगस्त 2026 को संजय गांधी अस्पताल में हुई थी। मामले में अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे। शुरुआती कार्रवाई के बाद करीब 43 दिन बाद 8 अक्टूबर को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. गुंजन गोस्वामी को निलंबित किया गया था। उनके निलंबन के पीछे भोपाल से जारी निर्देशों और मामले की जांच का हवाला दिया गया था। 

जांच समिति के निष्कर्ष का दिया हवाला

अब करीब 20 दिन के भीतर उनकी बहाली की खबर सामने आने के बाद चर्चा है कि विभाग ने जांच समिति के निष्कर्षों को आधार बनाया है। हालांकि, बहाली के आदेश और जांच समिति की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण इसके आधार और शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

क्या निलंबन सिर्फ औपचारिक कार्रवाई?

डॉ. गुंजन गोस्वामी के निलंबन के अगले ही दिन मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन डीन डॉ. शशिधर गर्ग ने कहा था कि निलंबन को सजा नहीं माना जाना चाहिए और जांच जारी रहेगी। ऐसे में जल्द बहाली ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या जांच में डॉक्टर को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं पाया गया? क्या बहाली के बावजूद विभागीय जांच जारी रहेगी? और क्या कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय हो पाएगी? फिलहाल, इस पूरे मामले में बहाली के आदेश और जांच समिति के निष्कर्ष सार्वजनिक होने के बाद ही प्रशासनिक फैसले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।