भोपाल: 9 महीने बाद भी अधर में ई-रिक्शा नीति, कौन तय करेगा रूट?
राजधानी भोपाल में 9 महीने बीत जाने के बाद भी ई-रिक्शा रूट तय न होने से भोपाल की सड़कों पर अव्यवस्था, जाम और सुरक्षा संकट गहराता जा रहा है। प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
भोपाल:राजधानी की सड़कों पर ई-रिक्शा अब सुविधा नहीं बल्कि ट्रैफिक संकट बन चुके हैं। हालात यह हैं कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 9 महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन यह तय नहीं कर पाया कि ई-रिक्शा के रूट कौन फाइनल करेगा। नतीजा-शहर भर में अव्यवस्था, जाम और आम नागरिकों की परेशानी।
नाबालिग चला रहे ई-रिक्शा
यह ई रिक्शा स्कूली बच्चों को भी धड़ल्ले से आपने वाहन में बैठा कर ले जा रहे हैं. बैटरी से चलने वाले इन ई- रिक्शा वाहनों में यात्री की सुरक्षा के कोई इंतजामात नहीं हैं। नाबालिग बच्चे धड़ल्ले से भोपाल की सड़कों पर यह ई रिक्शा दौड़ा रहे है। प्रशासन का कोई नुमायनता रोकने टोकने वाला नहीं है।

25 अप्रैल 2025 को भोपाल कलेक्टर कौशैलेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में तय हुआ था कि राजधानी में इलाकेवार ई-रिक्शा रूट बनाए जाएंगे। ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम को इस पर अमल के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज तक न नगर निगम ने ड्राफ्ट तैयार किया और न ही ट्रैफिक पुलिस कोई ठोस प्लान लेकर आई।
बिना तय रूट, बिना परमिट और बिना स्टैंड के दौड़ रहे ई-रिक्शा
शहर की सड़कों पर इस समय 13 हजार से अधिक ई-रिक्शा बिना तय रूट, बिना परमिट और बिना स्टैंड के दौड़ रहे हैं। जहां सवारी मिली, वहीं रिक्शा रोक दिया जाता है। इससे पीछे चल रहे वाहन अचानक ब्रेक लगाने को मजबूर होते हैं और जाम लग जाता है। पुराने भोपाल की तंग गलियों से लेकर नए भोपाल की व्यस्त सड़कों तक हालात एक जैसे हैं।कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच जिम्मेदारी को लेकर पिंग-पोंग चलता रहा।
हर महीने 150 नए ई-रिक्शा, लेकिन नियम आज भी नदारद
वहीं ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी अब तक कोई अंतिम नीति सामने नहीं आई।बैठक में ई-रिक्शा संचालन को लेकर जो निर्देश दिए गए थे। जोन वाइज संचालन, रूट के साथ परमिट, तय स्टैंड, बाईं लेन में संचालन, सिटी बस मार्गों पर प्रतिबंध और कॉलोनियों तक सीमित संचालन वे सभी फाइलों में ही कैद रह गए।
आखिर कब तय होंगे ई-रिक्शा रूट, भोपाल की सड़कों पर बढ़ता संकट
शहर में हर महीने करीब 150 नए ई-रिक्शा जुड़ रहे हैं। न चालकों की वर्दी तय है, न नेमप्लेट, न किराए का कोई मानक। धीमी गति के कारण ये मुख्य मार्गों पर वाहनों की रफ्तार कम कर रहे हैं, जिससे ईंधन की खपत और दुर्घटना का खतरा दोनों बढ़ रहे हैं।9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन जवाब अब भी अधूरा है. ई-रिक्शा के रूट आखिर कब और कौन तय करेगा? जब तक यह फैसला नहीं होता, राजधानी की सड़कें यूं ही अराजकता की गिरफ्त में बनी रहेंगी।
ADD.DCP बोले- कार्रवाई कर रहे,लेकिन अभी सख्ती नही हो पाई
एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक संजय सिंह पंवार ने बताया कि भोपाल तीन से चार माह पहले आठ जगह हमने बंद किए थे.कार्रवाई कर रहे है लेकिन उतनी अभी सख्ती नही हो पाई है। रुट प्लान बनाकर RTO को दिया गया है। जब आरटीओ सेक्टर तय कर देगें। तब रुट बाट दिया जाएगा।
sanjay patidar 
