आखिर क्यों बदला 51 साल पुराने खजुराहो नृत्य समारोह का नाम, अब किस नाम से मिली पहचान
मध्य प्रदेश के मशहूर खजुराहो नृत्य समारोह का नाम अब बदल दिया गया है। राज्य सरकार ने इसे नई पहचान देते हुए ‘नटराज महोत्सव’ नाम दिया है।
मध्य प्रदेश के मशहूर खजुराहो नृत्य समारोह का नाम अब बदल दिया गया है। राज्य सरकार ने इसे नई पहचान देते हुए ‘नटराज महोत्सव’ नाम दिया है। यह बदलाव सिर्फ नाम में नहीं, बल्कि पूरे आयोजन की भावना में एक नई दिशा लाने की कोशिश माना जा रहा है, जो आने वाले समय में इसकी छवि बदल सकता है।
1975 से शुरू यह आयोजन आधी सदी से भी ज्यादा समय से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सबसे प्रतिष्ठित पहचान रहा है। दुनिया भर के कलाकार इस मंच पर प्रस्तुति देना अपने करियर की उपलब्धि समझते हैं। अब यह ऐतिहासिक मंच नए नाम के साथ 2026 में पूरी तरह नए रूप में दर्शकों के सामने आएगा।
क्यों बदला नाम?
पिछले कुछ वर्षों से सरकार लगातार यह महसूस कर रही थी कि खजुराहो जैसे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थल पर होने वाले इस कार्यक्रम को भारतीय परंपराओं से और गहराई से जोड़ने की जरूरत है। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका नाम बदलने का फैसला लिया। उनका कहना है कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की जड़ें भगवान नटराज से जुड़ी हैं, इसलिए आयोजन की पहचान भी उसी भाव को प्रदर्शित करनी चाहिए।
सरकार का मानना है कि नया नाम केवल बदलाव नहीं है, बल्कि भारतीय कला, धर्म और सांस्कृतिक विरासत के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास है। खासकर खजुराहो, जहाँ शिव की परंपरा और मंदिरों की अनोखी शिल्पकला पूरी दुनिया में मशहूर है, वहाँ नटराज नाम अपने आप में एक स्वाभाविक जुड़ाव पैदा करता है।
नटराज नाम के पीछे छिपा धार्मिक और कलात्मक अर्थ
नटराज शिव का वह स्वरूप है जिसमें वे ब्रह्मांडीय नृत्य करते हैं। हिंदू दर्शन में यह नृत्य सृजन और विनाश दोनों का प्रतीक है। भारत के सभी शास्त्रीय नृत्य रूप, किसी न किसी रूप में, इस दिव्य नृत्य दर्शन से प्रेरणा लेते हैं। इसलिए इस आयोजन को नटराज नाम देना इसे एक आध्यात्मिक आधार देता है।
इसके साथ ही खजुराहो के मंदिरों में मौजूद नृत्य मुद्राएँ, मूर्तियाँ और कलात्मक संरचनाएँ भी शास्त्रीय नृत्य की जड़ों को मजबूत करती हैं। सरकार की कोशिश है कि नया नाम इस आयोजन को इसकी सांस्कृतिक जड़ों से और मजबूती से जोड़े, ताकि दर्शकों और कलाकारों दोनों के लिए यह अनुभव और भी गहरा हो सके।
खजुराहो से वैश्विक मंच तक समारोह की 51 साल की यात्रा
1975 में जब यह कार्यक्रम शुरू हुआ, तब यह केवल एक सांस्कृतिक पहल के रूप में शुरू हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे यह भारत का सबसे प्रतिष्ठित क्लासिकल डांस फेस्टिवल बन गया। इस मंच पर कई दिग्गज कलाकार अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं, जिनमें हेमा मालिनी, मीनाक्षी शेषाद्री, सोनल मानसिंह, बिरजू महाराज, मल्लिका साराभाई और अंतरराष्ट्रीय कलाकार भी शामिल हैं।
कला जगत में हमेशा माना गया है कि खजुराहो के मंच पर प्रस्तुति देना कलाकार के लिए सम्मान का प्रतीक है। कई कलाकार इसे अपने करियर की सबसे खास उपलब्धि मानते हैं। यही वजह है कि यह आयोजन साल दर साल अपनी अलग पहचान बनाता गया और दुनिया भर से कलाकार यहाँ आते रहे।
स्वर्ण जयंती के बाद आया बड़ा बदलाव
पिछले साल समारोह ने अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाई थी। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से कलाकार पहुँचे, विदेशी कला समूहों ने भी हिस्सा लिया और क्लासिकल से लेकर फ्यूजन तक की प्रस्तुतियाँ देखने को मिलीं। इसके बाद सरकार ने यह तय किया कि आयोजन के स्तर को और ऊँचा किया जाए।
स्वर्ण जयंती के बाद से ही राज्य सरकार लगातार इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही थी। इसी सोच के बीच नाम बदलने का फैसला आया, ताकि कार्यक्रम सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव न रहकर एक वैश्विक कला मंच बन सके।
नटराज महोत्सव 2026 में क्या होगा नया और कितना बदलेगा रूप
नाम बदलने के साथ ही आयोजन के प्रारूप में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार चाहती है कि 2026 से यह महोत्सव एक नए विज़न के साथ आयोजित हो, जिसमें परंपरा और आधुनिकता दोनों का संतुलन दिखे।
1. ज्यादा पारंपरिक और भारतीय स्वरूप
मंच की सजावट, थीम और कला प्रस्तुति में शिव तत्वों का उपयोग बढ़ेगा। खजुराहो मंदिरों की नक्काशी को मंच डिजाइन में शामिल किया जाएगा, ताकि कला को वही वातावरण मिले जिससे वह जुड़ी है।
2. अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी बढ़ेगी
सरकार की योजना है कि जापान, फ्रांस, रूस, अमेरिका, इंडोनेशिया सहित कई देशों को आमंत्रित किया जाए। इससे आयोजन का पैमाना बड़ा होगा और दर्शकों का दायरा भी बढ़ेगा।
3. युवाओं के लिए ‘नटराज युवा मंच’
पहली बार युवाओं और स्टूडेंट कलाकारों के लिए अलग मंच तैयार किया जा रहा है, जहाँ उन्हें प्रस्तुति का मौका मिलेगा। साथ ही वर्कशॉप, मास्टरक्लास और कला संवाद भी आयोजित होंगे।
4. खजुराहो की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव
इस आयोजन का सीधा फायदा स्थानीय होटल, टूर ऑपरेटर, हैंडीक्राफ्ट कलाकारों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिलेगा। पर्यटन में वृद्धि के साथ शहर की आय बढ़ेगी।
5. डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग का विस्तार
2026 से कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर की जाएगी, ताकि दुनिया भर के लोग इसे देख सकें। इससे कलाकारों की पहचान और पहुँच भी बढ़ेगी।
कलाकारों के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक मंच क्यों ?
कई कलाकारों का मानना है कि खजुराहो का मंच अपने आप में एक दिव्य अनुभव है। यहाँ मंदिरों की नक्काशी, शास्त्रीय नृत्य की मुद्राएँ और रात की रोशनी मिलकर एक अद्भुत माहौल तैयार करती हैं। कलाकारों के अनुसार, यहाँ प्रस्तुति देना जैसे कला को उसके सबसे पवित्र रूप में जीना है। खजुराहो की शांत हवा, प्रकृति का सुकून और मंदिरों का सौंदर्य कलाकार को अंदर से ऊर्जा देता है। कई कलाकार तो कहते हैं कि खजुराहो का मंच सिर्फ प्रस्तुति का स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का अनुभव है।
shivendra 
