चिड़ियाघर के वन्यजीवों को गोद लेने वाला कोई नहीं, अमीरों की बेरुखी

मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को शुरू हुए 10 साल हो गए, लेकिन वन्यजीवों को गोद लेने के लिए स्थानीय अमीर और उद्योगपति आगे नहीं आ रहे हैं। अभी सिर्फ एक-दो लोगों ने ही पहल की है।

चिड़ियाघर के वन्यजीवों को गोद लेने वाला कोई नहीं, अमीरों की बेरुखी

रीवा। मुकुंदपुर स्थित व्हाइट टाइगर सफारी और चिड़ियाघर को शुरू हुए करीब 10 साल हो चुके हैं, लेकिन यहां रहने वाले वन्यजीवों को गोद लेने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक गोद लेने वालों की संख्या 10 भी नहीं हो पाई है।

चिड़ियाघर प्रबंधन ने गोद लेने वालों की सूची तैयार कर रखी है, लेकिन बहुत कम लोग मामूली रकम देने को भी तैयार हैं। इस समय सिर्फ एक ही वन्यजीव को गोद लिया गया है। उसे गोद लेने वाले व्यक्ति ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं किया है। जानकारी के अनुसार, एक रिटायर्ड IAS अधिकारी ने अपने नाती के नाम से वन्यजीव को गोद लिया है।

बाहर से आने वाले कुछ लोग तो मदद कर रहे हैं, लेकिन विंध्य क्षेत्र के करोड़पति और लखपति लोग एक पैसा भी देने को तैयार नहीं हैं।

सफेद बाघ से मिली पहचान, लेकिन सहयोग नहीं

कई सालों बाद विंध्य क्षेत्र में सफेद बाघ की वापसी हुई। मुकुंदपुर में महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव चिड़ियाघर की स्थापना की गई। करीब 40 साल बाद सफेद बाघ की वापसी से विंध्य को देश और दुनिया में नई पहचान मिली है। आज यहां देश-विदेश से पर्यटक सफेद बाघ देखने आते हैं।

लोग इस पहचान का फायदा तो उठा रहे हैं, लेकिन चिड़ियाघर में रहने वाले जानवरों की देखभाल के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

उद्योगपति भी पीछे

विंध्य क्षेत्र से सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स मिलता है। यहां बड़े-बड़े उद्योगपति और अमीर लोग रहते हैं। वे खुद को वन्यजीव प्रेमी भी बताते हैं, लेकिन जानवरों के खर्च में मदद करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

चिड़ियाघर को बेहतर बनाने और जानवरों के लिए सुविधाएं बढ़ाने में प्रबंधन को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। बजट भी पूरा नहीं मिल पाता। फिलहाल टिकट से होने वाली कमाई से ही किसी तरह जानवरों की देखभाल की जा रही है।

अगर विंध्य के उद्योगपति आगे आएं, तो यह चिड़ियाघर देश और प्रदेश का सबसे अच्छा चिड़ियाघर बन सकता है।

नाम छुपाकर की मदद

इस समय एक नर भालू को एक रिटायर्ड IAS अधिकारी ने अपने नाती के नाम से गोद लिया है। उन्होंने पूरे साल की राशि जमा कर दी है, लेकिन अपना नाम सार्वजनिक न करने की शर्त रखी है। उन्होंने यह काम करके अमीर लोगों को आईना दिखाया है।

एक डॉक्टर भी आए थे आगे

रीवा से सिर्फ एक डॉक्टर ने पहले वन्यजीव को गोद लिया था। उन्होंने देवा नाम के भालू को एक साल के लिए गोद लिया और पूरी रकम जमा की। उनकी पहल से बाकी अमीर लोग तो नहीं जागे, लेकिन एक रिटायर्ड IAS जरूर आगे आए।

  • गोद लेने के फायदे
  • गोद लेने पर आयकर में छूट मिलेगी
  • गोद लेने का प्रमाण पत्र दिया जाएगा
  • जानवर के बाड़े के बाहर गोद लेने वाले का नाम लगेगा
  • साल भर गोद लेने पर प्रवेश द्वार पर भी नाम लगाया जाएगा
  • जमा राशि का 10% मूल्य के मुफ्त पास मिलेंगे
  • गोद लिए गए जानवर के साथ फोटो दी जाएगी

गोद लेने की प्रक्रिया

जो लोग वन्यजीवों को गोद लेना चाहते हैं, वे निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन कर सकते हैं। आवेदन और राशि मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसायटी, सतना के खाते में जमा की जा सकती है। आवेदन पत्र किसी भी कार्यदिवस में सुबह 10:30 से शाम 5:30 बजे तक मुकुंदपुर स्थित चिड़ियाघर कार्यालय में जमा किया जा सकता है।