इंदौर में अवैध निर्माण पर लगेगी लगाम: सैटेलाइट से होगी निगरानी; नगर निगम ने तैयार किया डिजिटल सॉफ्टवेयर
Indore Municipal Corporation: इंदौर नगर निगम ने GIS मैपिंग और सैटेलाइट तकनीक से अवैध निर्माणों की निगरानी के लिए डिजिटल सॉफ्टवेयर तैयार किया है। 4 हजार वर्ग फीट से बड़े प्लॉट भी निगरानी में रहेंगे।
मध्य प्रदेश के इंदौर में अवैध निर्माणों पर रोक लगाने के लिए नगर निगम ने डिजिटल निगरानी व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत शहर में बनने वाली नई इमारतों, हाईराइज बिल्डिंग और बड़े भूखंडों पर होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी तकनीक के जरिए की जाएगी। इसके लिए नगर निगम ने मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) के सहयोग से एक अत्याधुनिक डिजिटल सॉफ्टवेयर तैयार किया है।
इस सॉफ्टवेयर की मदद से नगर निगम शहर की सीमा में होने वाले निर्माण और खाली भूखंडों की स्थिति में आने वाले बदलावों पर नजर रख सकेगा। खास बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था का संचालन नगर निगम स्तर से ही किया जा रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से पकड़े जाएंगे अवैध निर्माण
नगर निगम के इस सॉफ्टवेयर में GIS मैपिंग और सैटेलाइट इमेजरी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए अलग-अलग समय की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर जमीन और निर्माण की स्थिति में हुए बदलावों का पता लगाया जाएगा।
इस तकनीक से यह पहचानना आसान होगा कि किस इलाके में नया निर्माण शुरू हुआ है, किस भवन का आकार बदला गया है और कहां स्वीकृत निर्माण के अलावा अतिरिक्त निर्माण किया गया है। खासतौर पर 4 हजार वर्ग फीट से बड़े प्लॉटों और हाईराइज बिल्डिंगों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
अनुमति नहीं मिली तो भवन मालिक पर होगी कार्रवाई
सॉफ्टवेयर के जरिए किसी भूखंड पर निर्माण संबंधी बदलाव सामने आने के बाद नगर निगम संबंधित जोन के रिकॉर्ड से उसकी भवन निर्माण अनुमति का मिलान करेगा। यदि निर्माण के लिए वैध अनुमति नहीं मिलती है या भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाया जा रहा है, तो संबंधित भवन मालिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसमें नियमों के तहत कंपाउंडिंग या अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। हालांकि, कार्रवाई से पहले संबंधित भवन मालिक को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा। नगर निगम का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत ही की जाएगी।
वैध निर्माण करने वालों को परेशान करना उद्देश्य नहीं
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक, इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है, जो बिना अनुमति या स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण कर रहे हैं। वैध अनुमति लेकर निर्माण करने वाले नागरिकों को परेशान करना निगम का मकसद नहीं है।
नगर निगम को उम्मीद है कि इस तकनीक से अवैध निर्माणों की शुरुआती स्तर पर ही पहचान हो सकेगी। इससे भवन निर्माण अनुमति व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और शहर में अनधिकृत निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

