इंदौर दूषित पानी मामले में CM का एक्शन: 2 अफसरों पर गिरी गाज, 3 नए अपर आयुक्त नियुक्त

इंदौर में 15 मौतों के बाद देशभर में मचा बवाल। भोपाल-इंदौर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन। उमा भारती से लेकर राहुल-खड़गे ने बीजेपी सरकार को घेरा। पढ़ें दूषित पानी मामले से जुड़ी अब तक की सारीं अपडेट पढ़ें...

इंदौर दूषित पानी मामले में CM का एक्शन: 2 अफसरों पर गिरी गाज, 3 नए अपर आयुक्त नियुक्त
Indore Contaminated Water

इंदौर। शहर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौतों के बाद से देशभर में हाहाकार मचा हुआ है। अब इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा एक्शन लिया है।नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को इंदौर से हटा दिया गया है। वहीं, इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया है। इसके साथ ही सीएम ने नगर निगम में सभी जरूरी खाली पदों को तत्काल प्रभाव से भरने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया- 

"आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की। इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए। इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए।"

प्रशासनिक सर्जरी, 3 नए अपर आयुक्त नियुक्त

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद दूषित पानी से मौतों के मामले में राज्य सरकार ने इंदौर नगर निगम में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। इंदौर नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया का तबादला करते हुए उन्हें किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया है। इसके साथ ही इंदौर नगर निगम को तीन नए अपर आयुक्त मिले हैं। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह और आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त बनाया गया है। इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को भी निगम में अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया गया है।

सीएम ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग 

इसके अलावा दूषित पेयजल मामले पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाई लेवल मीटिंग भी बुलाई है। इंदौर घटना के बाद पूरे प्रदेश में सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आज शाम होने वाली वर्चुअल बैठक में 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष तथा आयुक्त एवं जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग व अन्य संबंधित मुख्यालय स्तर के अधिकारियों शामिल होंगे, जिसमें पूरे प्रदेश की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और पीएचई विभाग की संयुक्त समीक्षा होगी। साथ ही समयबद्ध एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए जाएंगे।

सीएम डॉ. मोहन यादव का कहना है कि इंदौर जैसी घटना दोबारा न हो, इसलिए सरकार सतर्क है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई के बाद अब सिस्टम सुधार पर फोकस रहेगा। पेयजल आपूर्ति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। प्रदेशभर में जल वितरण व्यवस्था की जांच होगी। 

HC में MP सरकार बोली- 4 की मौत हुई

इससे पहले, मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की, जिसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौत होने की बात कही है। सरकार की ये रिपोर्ट तब आई है, जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों के जरिए 15 मौतों की जानकारी है। सभी को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। कुछ को बुखार भी था। इनमें 5 महीने के मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने खुलासा किया कि निगम कर्मियों ने पानी की टंकी में ज्यादा मात्रा में क्लोरीन मिला दिया था, जिससे हजारों की संख्या में क्षेत्रीय रहवासी को उल्टी-दस्त-बुखार जैसी गंभीर बीमारी हो गई। 

हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 6 जनवरी को

हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जनवरी तय की है। वहीं, इंटर विनर (हस्तक्षेप कर्ता) गोविंद सिंह बैस की ओर से मीडिया में रिपोर्ट पब्लिश करने पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की। बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।

राहुल गांधी और खड़गे ने भाजपा को घेरा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा। ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, ये जवाबदेही की मांग है। मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है। साफ पानी अहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। 

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट कर लिखा- जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले नरेंद्र मोदी जी, हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं। यह वही इंदौर शहर है, जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता है। 11 साल से देश केवल लंबे-चौड़े भाषण, झूठ-प्रपंच, खोखले दावे, डबल-इंजन की डींगें सुन रहा है।

पूर्व सीएम उमा भारती ने भी बोला हमला

पूर्व सीएम उमा भारती ने भी बीजेपी पर हमला बोला और सोशल मीडिया पोस्ट कर लिखा- साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारे प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवॉर्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडितजनों से माफी मांगनी होगी। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है। सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं। इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?

इंदौर और भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन 

एमपी की राजधानी भोपाल में इंदौर मामले को लेकर कांग्रेस कार्यालय पर प्रदर्शन हुआ। वहीं, युवा कांग्रेस ने इंदौर नगर निगम मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में नगर निगम मुख्यालय पहुंचे युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम अधिकारियों, महापौर और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए नगर निगम मुख्यालय पर पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को निगम मुख्यालय के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई बार हल्की झड़प भी देखने को मिली। वहीं, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया गया। हालांकि, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता लगातार प्रशासन और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते रहे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे।

खुले चेंबर, गंदा पानी नलों से पहुंच रहा

इंदौर में नगर निगम की अनदेखी के विरोध में कांग्रेस पार्षद के नेतृत्व में रहवासियों ने अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। लोगों ने आंखों पर पट्टी बांधकर निगम की “आंख मूंदकर काम करने” की नीति पर सवाल खड़े किए। भोलाराम मार्ग स्थित जोन क्रमांक 13 पर कांग्रेस पार्षद के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। गायत्री नगर के रहवासियों के साथ वॉर्ड 75 और 77 के लोग बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इलाके में खुले चेंबर का गंदा पानी नलों के जरिए घरों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। रहवासियों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हालात भागीरथपुरा जैसी गंभीर स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन निगम आंख मूंदे बैठा है। प्रदर्शन के दौरान मांग की गई कि पानी की कल्चर रिपोर्ट बनाकर तत्काल जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

हाई कोर्ट में लगातार जनहित याचिकाएं दायर

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों और लोगों के बीमार होने के मामले ने अब न्यायिक रूप ले लिया है। इस गंभीर घटना को लेकर हाई कोर्ट में लगातार जनहित याचिकाएं दायर की जा रही हैं। इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई, वहीं एक नई जनहित याचिका पर भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। 31 दिसंबर को हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी की ओर से लगाई गई थी, जबकि दूसरी याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से दायर की गई थी। जिसमें पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव ने की। जिसमें 31 दिसंबर को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नगर निगम को अंतरिम आदेश जारी करते हुए सभी प्रभावित लोगों का मुफ्त इलाज कराने और क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इन्हीं आदेशों के पालन में 2 जनवरी को नगर निगम की ओर से स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की गई। आज इस मामले में एक तीसरी जनहित याचिका भी हाई कोर्ट में दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किए हैं। तीसरी याचिका पर अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी, जबकि पहले से दायर दो जनहित याचिकाओं पर 6 जनवरी को सुनवाई निर्धारित की गई है। मामले में अधिवक्ता मनीष यादव की ओर से अदालत के सामने यह मांग रखी गई कि मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में केवल चार मौतों का उल्लेख किया गया है, जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं। ऐसे में एक विस्तृत और तथ्यात्मक स्टेटस रिपोर्ट पेश किए जाने की भी मांग की गई है। फिलहाल हाई कोर्ट इस पूरे मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में इस पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

अब पढ़िए जिम्मेदारों ने क्या कहा - 

कलेक्टर शिवम वर्मा

कलेक्टर का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे का दायरा बढ़ा दिया है। जहां-जहां से मरीज सामने आए हैं, उन इलाकों को चिन्हित कर रिंग बनाकर सघन जांच की जा रही है। पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और संदिग्ध क्षेत्रों में लगातार सैंपलिंग की जा रही है। इसके साथ ही मरीजों की पहचान और इलाज पर विशेष फोकस किया गया है। आज ओपीडी में कुल 93 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 9 मरीजों की हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्तमान में लगभग 210 मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत हैं। सभी अस्पतालों को आवश्यक दवाइयों और इलाज की स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टरों के साथ बैठक कर इलाज की रणनीति पर चर्चा की गई है।

नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव

इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव ने कहा- वे पॉइंट हमने आईडेंटिफाई किए हैं, जहां से दूषित पानी पेयजल की पाइपलाइन में मिल रहा है। भागीरथपुरा में चौकी के पास बने शौचालय के अलावा 2000 से अधिक चैंबर हैं, सभी की जांच पड़ताल की जा रही है। जहां भी सीवेज के चेंबर के नीचे से पानी की पाइपलाइन क्रॉस हो रही है, उसे दुरुस्त किया जा रहा है। इसमें एक-दो दिन और लगेंगे, इसीलिए भागीरथपुरा में टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को पानी उबालकर ही पीने के लिए हम लगातार अनाउंसमेंट करा रहे हैं। स्थिति नॉर्मल होने में एक-दो दिन लगेंगे। भागीरथपुरा में पेयजल पाइपलाइन 1997 में बनी थी। इसको चेंज करने के लिए टेंडर की फाइल बनी थी लेकिन उसका काम अमृत योजना के तहत किया जाना था इसलिए उस काम को नहीं किया गया था। जो भी शिकायतें आ रही थीं, हमारी टीम लगातार उन पर काम कर रही थी।

नगर निगम के इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर

दूषित पानी से मौतों के मामले में इंदौर नगर निगम के इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है। उन्होंने कहा- सीएम के निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। उनका पालन किया जा रहा है। ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हम इससे बहुत शर्मिंदा हैं। बहुत दुखी हैं।

सरकार ने ही माना पानी में सीवेज मिला

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय- लीकेज से सीवेज मिला
भागीरथपुरा में पेयजल में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े हैं। जो आशंका थी कि पेयजल में सीवेज का पानी मिला है, उसका ट्रीटमेंट पहले से चालू था। अभी भी वही ट्रीटमेंट चल रहा है। मुझे लगता है कि चौकी के पास जो लीकेज वाली जगह है, वहीं इसकी सबसे प्रमुख आशंका है। बाकी की जगह भी 100 प्रतिशत जगह चेक करेंगे।

सांसद शंकर लालवानी- सैंपल की रिपोर्ट में बैक्टीरिया मिले
इलाके से लिए गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट में बैक्टीरिया मिले हैं। इसके बारे में अधिकृत जानकारी नगर निगम कमिश्नर ही देंगे। सांसद ने यह भी कहा कि मौतों और बीमारों का अधिकृत आंकड़ा भी जिम्मेदार अधिकारी जल्द ही जारी करेंगे। यहां के लोगों की डिमांड थी कि इलाके में और भी बोरिंग होनी चाहिए। इस पर हमने सांसद निधि से तुरंत 10 बोरिंग स्वीकार की हैं। मशीन बुलाकर काम भी शुरू करा दिया है।

सीएमएचओ डॉ. हसानी- दूषित पानी से ही बीमार पड़े, जानें हुईं
हॉस्पिटल (एमजीएम) की लैब में जांचे गए पानी के नमूनों की रिपोर्ट आज (गुरुवार) स्वास्थ्य विभाग को मिल गई है। इसमें साफ तौर पर पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और लोगों की जानें गईं। पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ है। यह किस जगह और किस लेवल का है, इसके बारे में संबंधित अधिकारी ही बता पाएंगे।

30 साल पहले लोगों ने 'मुर्दे का पानी' भी पीया

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। लेकिन ये पहली बार नहीं है, जब इंदौर ने पानी के ज़रिए आई एक अदृश्य त्रासदी देखी हो। करीब तीन दशक पहले भी शहर कुछ ऐसा ही सदमा झेल चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब वजह सामने आने में वक्त लगा था, लेकिन जब सफाई सामने आई, तो उसने रूह कंपा देने वाली थी। सुभाष चौक इलाके में आज भी एक पुरानी पानी की टंकी खामोशी से खड़ी है। करीब 30 साल पहले, इसी टंकी से पश्चिम इंदौर के हज़ारों घरों तक पीने का पानी पहुंचता था। उस वक्त नगर निगम रोज़ की तरह टंकी से पानी सप्लाई करता रहा। लोग उसी पानी को पीते रहे, उसी से खाना बनता रहा। लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि टंकी के भीतर कुछ ऐसा छुपा है, जो पूरे इलाके की सेहत को निगल रहा है। कुछ दिनों बाद हालात बिगड़ने लगे। उल्टी-दस्त, बुखार और पेट की बीमारियों से लोग एक के बाद एक बीमार पड़ने लगे। अस्पताल भरने लगे, लेकिन बीमारी की जड़ पकड़ में नहीं आ रही थी। फिर एक दिन लोगों ने शिकायत की नलों से आने वाले पानी में अजीब सी बदबू है। शिकायत नगर निगम तक पहुंची, जांच के आदेश दिए गए। जब निगम की टीम ने सुभाष चौक की टंकी खोली, तो सन्नाटा छा गया। टंकी के अंदर एक इंसान का कंकाल मिला। कब, कैसे और किसका है इस सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला। इस घटना को तीन दशक बीत गए, सरकारें बदलीं, चेहरे बदले, लेकिन सवाल वही है कि क्या सिस्टम बदला है और क्या भागीरथपुरा की आज की त्रासदी और सुभाष चौक की वो पुरानी घटना, दोनों एक ही चेतावनी देती हैं कि अगर पानी की निगरानी नहीं हुई, तो कीमत ज़िंदगी से चुकानी पड़ती है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निगम पर लगाया आरोप

30 जुलाई 2025 को इंदौर नगर निगम ने भागीरथपुरा में गंदे पानी से निजात के लिए लगभग 2.40 करोड़ की पाइपलाइन बिछाने और उससे संबंधित कार्यों के लिए निविदा प्रपत्र जारी किया। लेकिन निगम आयुक्त और अफसरों ने 5 महीने तक टेंडर दबाकर रखा। टेंडर के दस्तावेजों में गंदे पानी की शिकायतों का भी जिक्र था। इसके बावजूद दिसंबर तक टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। जब लोगों की मौत होने लगी और जिम्मेदारों पर आंच आई, तब जाकर आनन-फानन में टेंडर खोला गया। आगे उन्होनें कहा कि इस प्रशासनिक अपराध की कीमत जनता ने अपनी जान देकर चुकाई। अगर टेंडर समय पर निकलता, तो आज कई परिवार उजड़े न होते।यह लापरवाही नहीं बल्कि सीधे तौर पर सरकारी हत्या है। इस लापरवाही में निगम आयुक्त की भूमिका पर भी  सवाल खड़े हो रहे हैं ! उनपर अब तक कार्यवाही क्यों नहीं ? कहीं आयुक्त को मुख्यमंत्री जी के करीबी होने का लाभ तो नहीं दिया जा रहा ? मेरी मुख्यमंत्री से मांग है कि निगम आयुक्त समेत सभी दोषी अफसरों पर तत्काल कठोरतम कार्रवाई हो। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।