धार भोजशाला विवाद - एएसआई रिपोर्ट पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई, पक्षों से मांगे गए दावे-आपत्ति

धार की भोजशाला विवाद मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई होगी। एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर सभी पक्षों से दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं।

धार भोजशाला विवाद - एएसआई रिपोर्ट पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई, पक्षों से मांगे गए दावे-आपत्ति

मध्य प्रदेश के भोजशाला विवाद मामले में आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में अहम सुनवाई होनी है। अदालत ने पहले ही सभी पक्षों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर अपने दावे और आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश दिए थे। इन्हीं जवाबों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

100 दिन चला एएसआई का सर्वे:
हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने 22 मार्च 2024 से करीब 100 दिनों तक भोजशाला परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक सर्वे, जांच और सीमित उत्खनन किया था। इस टीम में पुरातत्वविद, अभिलेखविद, रसायनविद और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने परिसर के ऐतिहासिक और संरचनात्मक प्रमाणों की जांच की।

रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी:
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि एएसआई की रिपोर्ट पहले ही अनसील होकर याचिकाकर्ताओं को दी जा चुकी है, इसलिए इसे दोबारा कोर्ट में खोलने की जरूरत नहीं है। अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया था कि वे रिपोर्ट पर लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई सुनवाई:

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 22 जनवरी को निर्देश दिया था कि इंदौर बेंच तीन हफ्तों के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाए। इससे पहले सर्वे के बाद की कानूनी प्रक्रिया पर कुछ समय के लिए रोक लगी थी, जो अब हट चुकी है।

केस ट्रांसफर के बाद फिर इंदौर बेंच में:

भोजशाला विवाद से जुड़ा मामला पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जबलपुर प्रिंसिपल बेंच भेजा गया था। बाद में चीफ जस्टिस संजय सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद इसे फिर से इंदौर बेंच को ट्रांसफर कर दिया।

एएसआई रिपोर्ट में क्या मिला:
एएसआई की जांच में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण सामने आए हैं:

  1. 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के साक्ष्य
  2. संस्कृत-प्राकृत और नागरी लिपि में लिखे अभिलेख
  3. 56 अरबी-फारसी शिलालेख, जिनमें दुआएं और धार्मिक वाक्य
  4.  12वीं–16वीं सदी के शिलालेख, जिनमें पारिजातमंजरी नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख
  5. कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत

क्या है पूरा विवाद:
धार की भोजशाला को लेकर लंबे समय से पूजा के अधिकार बनाम नमाज की अनुमति को लेकर विवाद चल रहा है।