ईरान पर हाइपरसोनिक हमले की तैयारी! अमेरिका अब 'डार्क ईगल' से बचे हुए ईरानी नेताओं को टारगेट कर सकता है

अमेरिका ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइल से हमला कर सकता है। CENTCOM ने ट्रम्प को छोटे लेकिन ताकतवर हमले का प्लान दिया है, जिसमें ईरान के सैन्य ठिकानों और नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है।

ईरान पर हाइपरसोनिक हमले की तैयारी! अमेरिका अब 'डार्क ईगल' से बचे हुए ईरानी नेताओं को टारगेट कर सकता है

तूफान अभी थमा नहीं है। अमेरिका अब ईरान के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल करने वाला है – वो भी पहली बार! CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पूरा प्लान पेश कर दिया है। ये कोई मामूली ऑपरेशन नहीं है। ये छोटा लेकिन बेहद ताकतवर हमला होगा, जिसमें ईरान की बची-खुची सैन्य ताकत, उसके बचे हुए नेता और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ ध्वस्त करने का प्लान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन अब डार्क ईगल नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल को इलाके में भेजने की तैयारी कर रहा है। ये मिसाइल करीब 3,200 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है। ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को इतनी गहराई में छिपा लिया है कि पुरानी मिसाइलें अब उन तक नहीं पहुंच रही। लेकिन डार्क ईगल? ये आग की तरह घुसकर निशाना भेद देगी। इसके अलावा B-1B लांसर बॉम्बर विमानों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है। ये भारी भरकम हथियार ले जाने में माहिर हैं और हाइपरसोनिक हथियार भी ढो सकते हैं। मतलब साफ है अमेरिका अब सर्जिकल स्ट्राइक से आगे बढ़कर डेस्ट्रक्शन मोड में आ रहा है।


ट्रम्प का रॉकस्टार अंदाज..
ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर अपनी फोटो शेयर करते हुए लिखा- तूफान आगे बढ़ रहा है। इसे कोई नहीं रोक सकता! ये कोई खाली धमकी नहीं। CENTCOM चीफ ने ट्रम्प को विकल्प दिए हैं कि अगर बात नहीं बनी तो ईरान के बचे हुए कमांड सेंटर, मिसाइल साइट्स और लीडरशिप को टारगेट किया जा सकता है। मुजतबा खामेनेई (ईरान के नए सुप्रीम लीडर) की सेहत को लेकर पहले से ही सस्पेंस चल रहा है। वो सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि फरवरी के शुरुआती हमलों में उन्हें चोटें लगी थीं।


ईरान का जवाब..
समंदर में डुबो देंगे, ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी है, हम हमलावरों को फारस की खाड़ी में डुबो देंगे। उनके लिए यहां कोई जगह नहीं है। लेकिन हकीकत ये है कि ईरान की सैन्य ताकत पहले ही भारी नुकसान झेल चुकी है। फरवरी 28 से शुरू हुए संघर्ष में अमेरिका-इजराइल की joint कार्रवाई ने ईरान की नौसेना, मिसाइल फैसिलिटी और एयर डिफेंस को काफी हद तक कमजोर कर दिया। अब सीजफायर चल रहा है, लेकिन दोनों तरफ से तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा।


पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट्स..

  • तेल की कीमतों में आग - कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में थोड़ा कम होकर 115 के आसपास आया। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव अभी भी बना हुआ है।
  • ट्रम्प ने यूरोप को धमकी - इटली और स्पेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की बात की। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर भी भड़के, अपना ध्यान रूस-यूक्रेन पर लगाओ, ईरान में दखल मत दो!
  • वॉर पावर्स रिजोल्यूशन का खेल - 60 दिन की डेडलाइन आज पूरी हो रही थी, लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि सीजफायर की वजह से ये समय रुक गया है। अमेरिका अभी खुद को युद्ध में नहीं मान रहा।
  • UN में ईरान का आरोप - ईरान ने 6 अरब देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने अमेरिका-इजराइल को अपने ठिकाने इस्तेमाल करने दिए। कहा कि जो मदद करेंगे, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
  • अमेरिकी नौसेना तैयार - USS डेलबर्ट डी ब्लैक जैसे डेस्ट्रॉयर पर ईंधन, हथियार और सप्लाई लोड की जा रही है। लंबे ऑपरेशन की तैयारी साफ दिख रही है।

क्या होगा आगे..
अगर ट्रम्प ग्रीन सिग्नल देते हैं तो डार्क ईगल जैसी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी पहली बार रियल वॉर में इस्तेमाल होगी। ये मिसाइल Mach 5+ की स्पीड से उड़ती है और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है। ईरान के बचे हुए बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और कमांड स्ट्रक्चर इसके टारगेट हो सकते हैं। दूसरी तरफ ईरान भी होर्मुज स्ट्रेट को हथियार बनाकर तेल की सप्लाई रोकने की कोशिश कर रहा है, जिससे पूरी दुनिया महंगाई की मार झेल रही है।

ये कोई फिल्म नहीं है, ये जियो-पॉलिटिक्स का सबसे खतरनाक चैप्टर है। अमेरिका दिखाना चाहता है कि वो अभी भी दुनिया का सबसे ताकतवर प्लेयर है। ईरान आत्मरक्षा का राग अलाप रहा है, लेकिन उसकी सैन्य मशीनरी पहले ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
अब सवाल ये है - ट्रम्प छोटा लेकिन घातक हमला करेंगे या बातचीत से निकालेंगे, तूफान आगे बढ़ रहा है और ये अभी रुकने वाला नहीं लगता।