MP में 2025 बैच के 8 IAS अधिकारियों की पहली पोस्टिंग, 8 जिलों में बनाए गए सहायक कलेक्टर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दूरदर्शी निर्णय। युवा IAS अधिकारियों को आदिवासी और महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास के जिलों में सहायक कलेक्टर के रूप में किया नियुक्ति।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर अपनी प्रशासनिक कुशलता और संवेदनशील नेतृत्व का परिचय देते हुए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश सरकार ने 2025 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों की पहली पदस्थापना को लेकर आदेश जारी किया।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 24 अप्रैल 2026 को जारी इस आदेश के अनुसार, कुल 8 ट्रेनी IAS अधिकारियों को राज्य के अलग-अलग 8 जिलों में सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया है। आदेश में बताया गया है कि ये सभी अधिकारी अब अपने-अपने जिलों में जाकर प्रशासनिक कार्यभार संभालेंगे। यह नियुक्तियां उनके मसूरी स्थित प्रशिक्षण संस्थान में प्रथम चरण का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद की गई हैं।

इन 8 जिलों में हुई है IAS की पोस्टिंग
सरकार ने इन अधिकारियों को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात किया है, जिनमें आदिवासी और विकासशील क्षेत्र भी शामिल हैं। आदेश के मुताबिक, इन अधिकारियों को झाबुआ, धार, बड़वानी, सिंगरौली, कटनी, खंडवा, बैतूल और मंडला जैसे जिलों में भेजा गया है। ये जिले प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जहां काम का अच्छा अनुभव मिलता है।
इन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
- आयुषी बंसल — झाबुआ
- आशी शर्मा — धार
- माधव अग्रवाल — बड़वानी
- सौम्या मिश्रा — सिंगरौली
- श्लोक वाडकर — कटनी
- शिल्पा चौहान — खंडवा
- खोट पुष्पराज नानासाहेब — बैतूल
- शैलेन्द्र चौधरी — मंडला
प्रशिक्षण के बाद पहली जिम्मेदारी
ये सभी अधिकारी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में अपना प्रारंभिक प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। इसके बाद अब इन्हें फील्ड में काम करने के लिए भेजा गया है। सहायक कलेक्टर के रूप में ये अधिकारी जिले में प्रशासनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और जन समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाएंगे।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये अधिकारी 17 अप्रैल 2026 को प्रशिक्षण से कार्यमुक्त होने के बाद, निर्धारित समय सीमा में अपने-अपने जिलों में जाकर कार्यभार ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही उन्हें कार्यभार ग्रहण अवधि (Joining Time) का लाभ भी दिया जाएगा।
जमीनी प्रशासन की सच्ची पाठशाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि वे चाहते हैं कि प्रदेश के नौकरशाह फाइलों के अधिकारी न बनकर जन-अधिकारी बनें, जो आम आदमी की पीड़ा को महसूस करें। साथ ही उसकी समस्याओं को उसकी भाषा में समझें और उसके समाधान के लिए अथक परिश्रम करें।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि नए IAS अधिकारी शुरुआत से ही जमीनी हकीकत को समझें। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने से उन्हें प्रशासन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने का मौका मिलेगा। इससे वे भविष्य में बेहतर निर्णय लेने वाले अधिकारी बन सकेंगे।
यह पहल उन करोड़ों आदिवासी बंधु-भगिनियों के लिए भी एक उज्जवल संदेश है कि मध्यप्रदेश सरकार उनके विकास, उनके अधिकारों और उनकी समृद्धि के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। यह निर्णय निश्चित रूप से मध्यप्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
Varsha Shrivastava 
