77वां गणतंत्र दिवस: इंदौर और रीवा की केंद्रीय जेल से कैदियों को मिली रिहाई, नई जिंदगी की शुरुआत
गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंदौर और रीवा की केंद्रीय जेल से 18 आजीवन कारावास की सजा काट चुके बंदियों को रिहा किया गया
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार की ओर से दी गई विशेष माफी के तहत प्रदेश की जेलों से आजीवन कारावास की सजा काट रहे कई बंदियों को रिहाई का लाभ मिला। इंदौर और रीवा की केंद्रीय जेलों से कुल 18 बंदियों को स्वतंत्रता मिली, जिनमें से इंदौर केंद्रीय जेल से 9 और रीवा केंद्रीय जेल से 9 बंदियों को रिहा किया गया। यह रिहाई शासन द्वारा अच्छे आचरण और निर्धारित सजा पूरी करने के आधार पर प्रदान की गई।
इंदौर केंद्रीय जेल से 9 बंदियों को किया रिहा
इंदौर स्थित केंद्रीय जेल में 26 जनवरी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान 9 आजीवन कारावास की सजा काट चुके बंदियों को रिहा किया गया। जेल प्रशासन के अनुसार, इन सभी कैदियों ने जेल में रहते हुए अनुकरणीय आचरण किया था, जिसके चलते उनके मामलों को शासन के समक्ष रखा गया। शासन से विशेष माफी मिलने के बाद इन बंदियों की रिहाई संभव हो सकी। रिहाई के दौरान एक कैदी खास तौर पर चर्चा में रहा, जो भगवा वस्त्र धारण किए हुए नजर आया। उसने जेल प्रशासन और मीडिया के सामने यह संकल्प व्यक्त किया कि वह आगे का पूरा जीवन अध्यात्म और भगवान की भक्ति में समर्पित करेगा। जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि जेल में कैदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है, जो सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक अच्छा संकेत है।

केंद्रीय जेल रीवा से 9 आजीवन कारावास के बंदी रिहा
वहीं दूसरी ओर, गणतंत्र दिवस पर केंद्रीय जेल रीवा से भी आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों को बड़ी राहत मिली। राज्य शासन द्वारा सजा में माफी के आदेश के तहत 10 बंदियों को रिहा किए जाने का आदेश जारी हुआ था। हालांकि, जुर्माना राशि जमा न होने के कारण एक बंदी को रिहा नहीं किया जा सका, जबकि शेष 9 बंदियों को आज रिहा कर दिया गया। केंद्रीय जेल रीवा के अधीक्षक एस.के. उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि अच्छे आचरण वाले बंदियों के मामलों को जिला स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। समिति की अनुशंसा पर राज्य शासन ने सजा में छूट प्रदान की।

जेल अधीक्षक ने बताया कि नंदीलाल वैगा नामक बंदी, जो शहडोल का निवासी है, जुर्माना राशि ₹1,00,000 जमा न कर पाने के कारण रिहा नहीं हो सका। उसे जुर्माना न भरने की स्थिति में दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यदि वह जुर्माना राशि जमा कर देता है, तो उसकी भी रिहाई की जाएगी।
Varsha Shrivastava 
