Bhopal Tree Cutting Case : कोर्ट के आसपास काटे पेड़, एनजीटी बार एसोसिएशन अब ट्रिब्यूनल पहुंचा

Bhopal Tree Cutting Case : भोपाल जिला कोर्ट के पास बिना अनुमति पेड़ काटने की शिकायत NGT पहुंची। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार और पांच विभागों के अधिकारियों को नोटिस देकर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

Bhopal Tree Cutting Case : कोर्ट के आसपास काटे पेड़, एनजीटी बार एसोसिएशन अब ट्रिब्यूनल पहुंचा

Bhopal Tree Cutting Case : भोपाल। जेल पहाड़ी रोड पर जिला कोर्ट के आसपास से पेड़ काट दिए गए। इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई। यह पर्यावरण नियमों के साथ ही मप्र वृक्षों का परिरक्षण अधिनियम, 2001 का उल्लंघन है। एनजीटी सेंट्रल बेंच की बार एसोसिएशन ने यह शिकायत ट्रिब्यूनल से की है। इस पर बेंच ने राज्य शासन से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। एसोसिएशन के रोहित शर्मा, ओम शंकर श्रीवास्तव, शांतनु सक्सेना और यादवेंद्र यादव ने बताया कि इस सिलसिले में बार के सचिव ने सेंट्रल बेंच को पत्र लिखा है। 

एसोसिएशन की ओर से कहा गया है कि नियम-प्रक्रिया का पालन किए बगैर बड़ी संख्या में पेड़ काटने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य शासन शहरी क्षेत्र में ट्री ऑफिसर के तौर पर नगर निगम आयुक्त या मुख्य नगरपालिका अधिकारी नियुक्त करेगा। साथ ही जमीन भले ही निजी हो पर उस पर लगा पेड़ बिना अनुमति नहीं काट सकेगा। 

एमसी मेहता बनाम कमल नाथ के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया। एनजीटी के सेंट्रल बेंच के 23 मई, 2025 को दिए आदेश का भी हवाला दिया है, इसमें कहा गया है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक 25 से अधिक पेड़ काटने की अनुमति देने के लिए सेंट्रली एम्पावर्ड कमेटी बनाएंगे। समिति आवेदन का परीक्षण करेगी और तय करेगी कि पेड़ काटने की जरूरत है या नहीं। अन्य विकल्पों पर भी विचार करेगी। इसके अलावा पेड़ों की संख्या पता करने के लिए राज्य और जिला स्तर गणना कराई जाएगी।

भोपाल में दो साल में ही कम हो गया 0.11 वर्गकिमी जंगल

एसोसिएशन ने बताया कि इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में साल 2021 में वानिकी वर्ष 2019 के मुकाबले 0.11 वर्गकिमी कम हो गई है। इतना ही नहीं, भोपाल जिले में बेहद घना जंगल नहीं बचा है। देश और मध्यप्रदेश का तुलनात्मक आंकड़ा भी प्रस्तुत किया है। इसके अनुसार 2019 को आंकलन वर्ष मानते हुए 2021 में देश में फॉरेस्ट और ट्री कवर बढ़ा है। यह करीब 2261 वर्गकिमी है, जबकि मप्र में फॉरेस्ट व ट्री कवर 143 वर्गकिमी घटा है। कुछ अन्य स्टडीज का जिक्र करते हुए तापमान बढ़ने, पारिस्थितिकीय संतुलन गड़बड़ाने और मानव सेहत पर विपरीत प्रभाव के बारे में भी ट्रिब्यूनल को बताया गया।

प्रमुख सचिव, कलेक्टर को बनाया पार्टी

ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा मानते हुए पांच विभागों के अफसरों को पार्टी बनाया है। इसमें पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के रीजनल ऑफिस के सचिव, भोपाल कलेक्टर, डिवीजनल फॉरस्ट ऑफिसर और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव शामिल हैं। इन सभी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।

साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएफओ को हिदायत दी है कि बिना अनुमति पेड़ नहीं कटना चाहिए। इस बीच राज्य शासन के वकील ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए कुछ समय देने का आग्रह किया। इसे स्वीकारते हुए बेंच ने चार सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।