MP हायर एजुकेशन में बदलाव: 3 जिलों में खुलेंगी नई यूनिवर्सिटी, अब पढ़ाई के बीच विषय बदल सकेंगे छात्र
मध्यप्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने विभाग की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश की और दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर ने मिशन 2028 का प्लान बताया।
भोपाल। प्रदेश सरकार के दो साल पूर होने के अवसर पर एक-एक कर सभी मंत्री अपने विभागों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने पेश कर रहें हैं। इसी कड़ी में सोमवार को राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने विभाग की उपलब्धियां बताने के साथ शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। आने वाले सालों में शिक्षा को और अधिक छात्र-केंद्रित, आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष विभाग में आने वाले समय में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेंगे।
पढ़ाई के बीच बदल सकेंगे विषय
मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि अब मध्यप्रदेश में छात्र पढ़ाई के दौरान अपने विषय बदल सकेंगे। नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को विषय चयन की पूरी स्वतंत्रता दी जा रही है। यदि कोई छात्र किसी कारणवश अपने चुने हुए विषय से संतुष्ट नहीं है, तो वह पढ़ाई के बीच में भी विषय परिवर्तन कर सकेगा। इससे छात्रों पर गलत निर्णय का दबाव कम होगा और वे अपनी रुचि व क्षमता के अनुसार शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना
शिक्षा के विस्तार को लेकर मंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि गुना, खरगोन और सागर में तीन नए विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विश्वविद्यालयों से न केवल उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि स्थानीय छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के बाद से भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी से बाहर निकालकर विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जिसमें शिक्षा की अहम भूमिका रही है।
55 कॉलेज बने ‘PM कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’
उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक करके कुल 55 महाविद्यालयों को ‘प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया गया है। इसके लिए 336 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन कॉलेजों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश के शासकीय और निजी महाविद्यालयों में 16 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
68 कॉलेजों में AI की पढ़ाई
तकनीकी शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालते हुए सरकार ने 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए 6 शासकीय और 17 स्वशासी महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर कृषि पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि सत्र 2025-26 में शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के नामांकन में 21.38 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
छात्रों को 750 करोड़ की सहायता
सरकार की छात्र हितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए मंत्री परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत वर्ष 2024-25 में 78,218 विद्यार्थियों को 750 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना से भी हजारों छात्रों को आर्थिक लाभ मिला है। एक विशेष पहल के तहत भोपाल और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की 50 मेधावी छात्राओं को अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई के लिए मैनिट (MANIT) भेजा गया है।
एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत सरकार ने 10वीं के बाद किए जाने वाले तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को 12वीं कक्षा के समकक्ष मान्यता दे दी है। अब पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारक छात्र सीधे स्नातक स्तर की अन्य डिग्रियों में प्रवेश के पात्र होंगे और उन्हें अलग से 12वीं कक्षा पास करने की आवश्यकता नहीं होगी।
मिशन 2028: कॉलेजों में बड़ा बदलाव
मंत्री इंदर सिंह परमार ने ‘मिशन 2028’ के तहत आने वाले सुधारों की भी जानकारी दी। नए सत्र से कॉलेजों में विद्यार्थियों की ई-अटेंडेंस ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही प्रोफेसरों की उपस्थिति भी इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड होगी, जिससे अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।
नई शिक्षा नीति के तहत फर्स्ट ईयर के सिलेबस में भारतीय ज्ञान परंपरा (BKP) को शामिल किया गया है। अगले शैक्षणिक सत्र से इसकी विधिवत पढ़ाई शुरू होगी। कुल 83 विषयों का नया सिलेबस तैयार किया गया है, जिसमें आधुनिक शिक्षा के साथ भारत की प्राचीन ज्ञान, दर्शन और अनुसंधान परंपरा का समन्वय किया गया है।
अतिथि विद्वानों को मिलेगी सुरक्षा
परीक्षाओं में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अब पूरी तरह डिजिटल होगा। परीक्षकों को कॉपियां ऑनलाइन भेजी जाएंगी, जिससे परिणाम जल्दी घोषित किए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रदेश में खनिज प्रौद्योगिकी विद्यालय स्थापित करने की तैयारी भी की जा रही है, जो खनन क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी कौशल विकास का केंद्र बनेगा।
इसके साथ ही मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी अतिथि विद्वान को सेवा से बाहर नहीं किया जाएगा। हरियाणा मॉडल का अध्ययन कर एक ठोस नीति बनाई जा रही है, जिससे अतिथि विद्वानों को लंबे समय तक सेवा सुरक्षा मिल सके।
Varsha Shrivastava 
